महाकुम्भ सांस्कृति महोत्सव विविधता में एकता का प्रतीक: चिदानन्द सरस्वती
महाकुम्भ सांस्कृति महोत्सव विविधता में एकता का प्रतीक: चिदानन्द सरस्वती

समर्पण, भक्ति और साधना को समर्पित महोत्सव महाकुम्भ
महाकुम्भ नगर, 10 फरवरी (हि.स.)। सांस्कृतिक महोत्सव विविधता में एकता का प्रतीक है, यह एकजुटता, प्रेम और भाईचारे का संदेश पूरे विश्व को दे रहा है। यह बात सोमवार को प्रयागराज महाकुम्भ के परमार्थ निकेतन शिविर में आए देश व विदेश के श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कही।
बताया कि शिविर में हो रही प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि जब विभिन्न देशों के लोग एक साथ मिलकर भक्ति में लीन होते हैं, तो इसका प्रभाव ना केवल उनके जीवन पर, बल्कि पूरे संसार पर पड़ता है।
इस मौके पर डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि जब हम अपनी दैनिक क्रियाओं में भी भक्ति को शामिल करते हैं, तो हमारा जीवन एक दिव्य यात्रा बन जाता है। कीर्तन वह संगीत है जो न केवल हमारे कानों को बल्कि हमारी आत्मा को भी तृप्त करता है। प्रभु नाम जीवन के हर संघर्ष में शांति का मार्ग दिखाता है। महाकुम्भ के दिव्य अवसर पर परमार्थ निकेतन शिविर में भक्ति फेस्ट-दिव्य कीर्तन व सत्संग का आयोजन किया गया। आज का दिन समर्पण, भक्ति और साधना के प्रति समर्पित रहा। कीर्तन के दौरान अद्भुत श्रद्धा और समर्पण के दर्शन हुये। देश-विदेश से आए भक्तों ने प्रभु के नाम के उच्चारण में लीन होकर एक साथ आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। परमार्थ निकेतन शिविर में कई देशों से आये भक्ति समूहों ने कीर्तन के माध्यम से अपनी दिव्य भावनायें व्यक्त की। यूएस से आये भक्ति फेस्ट, हंगरी से आये हरिनाम समूह और अर्जेंटीना से आये सुदामा कीर्तन ग्रुप ने महाकुम्भ की पवित्र धरती पर अपने भव्य कीर्तन और भक्ति संगीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यूएस से आये भक्ति फेस्ट, हंगरी से आये हरिनाम, अर्जेंटीना से आये सुदामा कीर्तन ग्रुप सहित अन्य देशों के कलाकारों ने दिव्य कीर्तन, मंत्रोच्चारण और भक्ति संगीत से पूरे वातावरण को दिव्यमय बना दिया।
परमार्थ शिविर में आयोजित यह कीर्तन एवं सत्संग कार्यक्रम सांस्कृतिक आदान-प्रदान का दिव्य प्रतीक है। भारतीय भक्ति संगीत पूरे विश्व को शान्ति व भक्ति की शक्ति के दर्शन करा रहा है। हंगरी से आये हरिनाम कीर्तन ग्रुप ने अपनी अद्भुत ध्वनियों से श्रद्धालुओं को भक्ति की गहराईयों का अनुभव कराया, उनके हर एक भक्ति गीत का एक अनोखा अनुभव था, जो श्रोताओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ रहा था। हंगरी के कलाकारों की यह प्रस्तुति भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनकी श्रद्धा को भी दर्शाती है।
अर्जेंटीना से आये सुदामा कीर्तन ग्रुप ने भी अपनी अद्भुत प्रस्तुतियां दीं। अर्जेंटीना के इस कीर्तन ग्रुप ने न केवल अपने देश की संस्कृति को भारतीय संस्कृति से जोड़ा, बल्कि भारतीय भक्ति संगीत को अपनी विशेष शैली में प्रस्तुत किया। उनका कीर्तन सुनने से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वे पूरी दुनिया को एक साथ एक दिव्य और आत्मिक अनुभव में सहभागी बना रहे थे। अर्जेंटीना के कलाकारों के साथ भारतीय और अन्य देशों के भक्तों ने मिलकर इस भक्ति संगीत का आनंद लिया, जो एकता और सद्भाव का प्रतीक था।
महाकुम्भ का आयोजन न केवल भारत, बल्कि विश्व भर के भक्तों के लिए अद्वितीय अनुभव
श्रीप्रेम बाबा ने कहा कि महाकुम्भ का यह आयोजन न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के भक्तों के लिए एक अद्वितीय अनुभव है। इस आयोजन में विदेशी श्रद्धालुओं ने न केवल महाकुम्भ के धार्मिक महत्व को समझ रहे हैं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का भी आनंद ले रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि महाकुम्भ की यह अद्वितीय भक्ति संगीत यात्रा हमेशा याद रखी जाएगी।