महाकुम्भ में दुनिया के पांच देशों की आबादी के बराबर श्रद्धालुओं ने लगायी डुबकी, आज अंतिम स्नान
महाकुम्भ में दुनिया के पांच देशों की आबादी के बराबर श्रद्धालुओं ने लगायी डुबकी, आज अंतिम स्नान

महाकुम्भ नगर, 26 फरवरी (हि.स.)। महाकुम्भ का आज आखिरी दिन है। पिछले 44 दिन में करीब 66 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। यह आंकड़ा दुनिया के पांच शक्तिशाली देशों की कुल आबादी के बराबर है। संगम में डुबकी लगाने वालों की यह संख्या 193 देशों की जनसंख्या से ज्यादा है। सिर्फ भारत और चीन की आबादी महाकुम्भ आए श्रद्धालुओं से ज्यादा है।
बता दें, महाशिवरात्रि पर्व स्नान के साथ ही 45 दिनों तक चले महाकुम्भ का समापन हो जाएगा।
पांच शक्तिशाली देशों के बराबर श्रद्धालु पहुंचे : 13 जनवरी से शुरू हुये महाकुम्भ में अब तक करीब 66 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने पहुंचे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और कनाडा की कुल आबादी के बराबर है। अमेरिका की आबादी 34.01 करोड़, ब्रिटेन की 6.84 करोड़, रशिया की 14.38 करोड़, फ्रांस की 6.83 करोड़ और कनाडा की 4.01 करोड़ है। इस लिहाज से इन पांच देश की आबादी एक बार महाकुम्भ में स्नान कर चुकी है।
नया कीर्तिमान बनाएगा श्रद्धालुओं का आंकड़ा : महाकुम्भ का आज आखिरी दिन है। दोहपर 12 बजे तक 1.01 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं। पिछले 44 दिन में करीब 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। महाशिवरात्रि पर्व स्नान के साथ ही 45 दिनों तक चले महाकुम्भ का समापन हो जाएगा। आज शिवरात्रि पर 3 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
मुख्य स्नान पर्वों पर बढ़ी भीड़ : महाकुम्भ की शुरूआत 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ हुई। इस दिन 1.70 करोड़ ने संगम में पुण्य की डुबकी लगायी थी। इस स्नान के अगले ही दिन 14 जनवरी को मकर संक्रांति को प्रथम अमृत स्नान था। इस दिन 3.50 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगाकर पुण्य की भागी बनें। 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन दूसरा अमृत और महाकुम्भ का तीसरा स्नान था। इस दिन दुखद हादसा भी पेश आया था, जिसमें 30 श्रद्धालु जान गंवा बैठे थे। दूसरे अमृत स्नान के दिन 7.64 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। 03 फरवरी बसंत पंचमी को तीसरा और अंतिम अमृत स्नान था। इस दिन 2.57 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगाने प्रयागराज पहुंचे। 12 फरवरी माघ पूर्णिमा के दिन महाकुम्भ का पांचवां स्नान सम्पन्न हुआ। इस दिन 2.04 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगायी। इसी दिन स्नान दान के साथ एक महीने से चले आ रहे कल्पवास का भी समापन हुआ।
वसंत पंचमी के बाद भीड़ कम नहीं हुई : प्राय: यह माना जाता कि वसंत पंचमी के स्नान के बाद मेले में भीड़ कम हो जाती है। क्योंकि वसंत पंचमी को अमृत स्नान के बाद अखाड़े अपने अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। 3 फरवरी को वसंत पंचमी के स्नान के दो दिन बाद तक भीड़ थोड़ी कम रही। लेकिन 6 फरवरी से श्रद्धालुओं का जो रेला प्रयागराज पहुंचना शुरू हुआ, वो अब तक लगातार जारी है। 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा के स्नान में 2.04 करोड़ शामिल हुए थे। 13 फरवरी को 85.46 लाख, 14 फरवरी को 96.98 लाख, 15 फरवरी को 1.36 करोड़, 16 फरवरी को 1.49 करोड़, 17 फरवरी को 1.35 करोड़, 18 फरवरी को 1.26 करोड़, 19 फरवरी को 1.08 करोड़, 20 फरवरी को 1.28 करोड़, 21 फरवरी को 1.28 करोड़, 22 फरवरी को 1.43 करोड़, 23 फरवरी को 1.32 करोड़, 24 फरवरी को 1.30 करोड़ और 25 फरवरी को 1.33 करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में डुबकी लगायी।
औसतन हर दिन डेढ करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी : इस बीच, महाकुम्भ में श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। पिछले सात दिनों में महाकुम्भ में रोजाना एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु त्रिवेणी की धारा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ में 65 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हो चुके हैं। अगर औसत की बात की जाए तो अब तक हर रोज डेढ करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। श्रद्धालुओं की यह संख्या अपने आप में एक महारिकॉर्ड है।
विशेष स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या : —13 जनवरी (पौष पूर्णिमा, महाकुम्भ की शुरूआत) को 1.70 करोड़—14 जनवरी (मकर संक्रांति, प्रथम अमृत स्नान) को 3.50 करोड़—29 जनवरी (मौनी अमावस्या, दूसरा अमृत स्नान) को 7.64 करोड़—03 फरवरी (वसंत पंचमी, तीसरा और अंतिम अमृत स्नान) को 2.57 करोड़—12 फरवरी (माघी पूर्णिमा स्नान) को 2.04 करोड़—26 फरवरी (महाशिवरात्रि) के 3 करोड़ अनुमानित