सेवा विनियमितिकरण में देरी के कारण सेवाजनित लाभ देने से इंकार नहीं कर सकते : हाईकोर्ट
सेवा विनियमितिकरण में देरी के कारण सेवाजनित लाभ देने से इंकार नहीं कर सकते : हाईकोर्ट
प्रयागराज, 12 फरवरी । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सेवा विनियमितीकरण में हुई देरी के कारण विभाग कर्मचारी को सेवा जनित लाभ देने से इंकार नहीं कर सकता।
कोर्ट ने नगर निगम प्रयागराज में कार्यरत अवर अभियंता (सिविल) राम सक्सेना की याचिका स्वीकार करते हुए अन्य समान कर्मचारियों के 10 अप्रैल 2003 को नियमित होने की तिथि से याची को नियमित सेवा में मानने व वरिष्ठता पुनर्निर्धारित करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने जूनियर इंजीनियर राम सक्सेना की याचिका पर दिया है। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि याची को अवर अभियंता (सिविल) के पद पर तदर्थ रूप से विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश पालिका (केंद्रीकृत) सेवा नियमावली, 1966 के नियम-31 के अंतर्गत 7 मार्च, 1995 को नियुक्त किया गया था तथा उसकी सेवाओं का नियमितीकरण 3 नवम्बर, 2015 को किया गया। नियम 21-ए(1) के अनुक्रम में जो कार्मिक 30 जून, 1998 के पूर्व तदर्थ आधार पर नियुक्त किए गए हैं तथा जो कर्मचारी 3 वर्ष की सेवा पूर्ण करते हुए निरंतर कार्यरत थे, उनकी सेवाओं का विनियमितिकरण 10 अप्रैल, 2003 से विभाग द्वारा किया जाना चाहिए था। लेकिन याची का विनियमितकरण 3 नवम्बर, 2015 को किया गया। विलम्ब से किए गए विनियमितकरण हेतु विभाग जिम्मेदार है, न कि याची।
एकल पीठ द्वारा याची के विनियमितकरण को 3 नवम्बर 15 की जगह 10 अप्रैल 2003 से किए जाने तथा पुनः वरिष्ठता का निर्धारण करते हुए वित्तीय लाभों के अलावा चंद्र मोहन यादव के केस में पारित निर्णय के अनुक्रम में पुरानी पेंशन सहित अन्य लाभ प्रदान किए जाने हेतु विभाग को निर्देशित किया।