एनसीआर की नई पहल : यार्ड निगरानी को 20 मीटर ऊंचे हाई मास्ट पर स्थापित किया अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरा

एनसीआर की नई पहल : यार्ड निगरानी को 20 मीटर ऊंचे हाई मास्ट पर स्थापित किया अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरा

एनसीआर की नई पहल : यार्ड निगरानी को 20 मीटर ऊंचे हाई मास्ट पर स्थापित किया अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरा

प्रयागराज, 12 फरवरी । उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के मार्गदर्शन एवं मंडल रेल प्रबंधक रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व में प्रयागराज मंडल के विद्युत सामान्य विभाग ने तकनीकी नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने प्रयागराज स्थित इलेक्ट्रिक ट्रिप शेड के 20 मीटर ऊंचे इलेक्ट्रिक हाई मास्ट के शीर्ष पर एक आधुनिक सीसीटीवी निगरानी कैमरा स्थापित और शुरू किया है।



यह जानकारी गुरूवार को वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी अमित मालवीय ने देते हुए बताया कि यह पहल रेलवे यार्डों की निगरानी क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आमतौर पर निचले स्तर पर लगे कैमरों से पूरे यार्ड की स्पष्ट तस्वीर मिलना कठिन होता है, लेकिन 20 मीटर की ऊंचाई पर कैमरा लगने से पूरे यार्ड का एक निर्बाध ’पैनोरमिक व्यू’ (विहंगम दृश्य) प्राप्त हो रहा है। इस कार्य को सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करते हुए निष्पादित किया गया है। परिचालन में बिना किसी बाधा के सभी संरचनात्मक और विद्युत सावधानियों के साथ इसे सुरक्षित रूप से स्थापित किया गया है।

उन्होंने बताया कि स्थापित किया गया कैमरा औद्योगिक श्रेणी की उन्नत तकनीक से लैस है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाला फुल एचडी (1920×1080) रेजोल्यूशन और प्रोग्रेसिव स्कैन सीएमओएस सेंसर है। बेहतर विजिबिलिटी के लिए 32×ऑप्टिकल ज़ूम और 16×डिजिटल ज़ूम है, जिससे दूर की वस्तुओं को भी स्पष्ट देखा जा सकता है। यह कैमरा चारों दिशाओं 360° घूमने में सक्षम है। इसमें मोशन डिटेक्शन, वीडियो टैम्परिंग और अलार्म इनपुट जैसी स्मार्ट सुविधाएं मौजूद हैं। आईपी 66 प्रोटेक्शन के साथ-साथ इसमें 4000वी लाइटनिंग (बिजली) और सर्ज प्रोटेक्शन दिया गया है, जो इसे खराब मौसम और बिजली गिरने से सुरक्षित रखता है।

पीआरओ ने बताया कि इस सिस्टम को मौजूदा निगरानी नेटवर्क के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे ब्लाइंड स्पॉट्स में कमी होगी। ऊंचाई पर होने के कारण यार्ड के उन हिस्सों पर भी नज़र रखी जा सकेगी जो पहले छिपे रहते थे। ट्रैक लाइनों, लोकोमोटिव बर्थिंग क्षेत्रों और रखरखाव क्षेत्रों की चौबीसों घंटे लाइव निगरानी संभव हो सकेगी। इससे अनधिकृत प्रवेश को रोकने और महत्वपूर्ण रेल सम्पत्तियों की सुरक्षा में मदद मिल सकेगी। साथ ही किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में प्रभावी विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। अंत में उन्होंने कहा कि यह कार्य उत्तर मध्य रेलवे की आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन और रेलवे बुनियादी ढांचे में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।