SIR पर कांग्रेस ने मांगी पारदर्शिता, आराधना मिश्रा बोलीं- कानून और प्रक्रिया के तहत हो मतदाता सूची में बदलाव
लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए और प्रक्रिया की सार्वजनिक जानकारी की मांग की।
लखनऊ, 26 सितंबर । कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैधानिकता सुनिश्चित करने की मांग की है। शनिवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ और राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से लेकर आयोग के भीतर सामने आई असहमतियों और मतदाता सूची में बदलाव तक कई मुद्दे उठाए।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि “लोकतंत्र में मतदाता सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि हर नागरिक के मताधिकार का आधार है। इसलिए इसमें किसी भी तरह का बदलाव कानून, पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर ही दो चुनाव आयुक्तों द्वारा विभिन्न फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की खबरों ने प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार विभिन्न फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, एसआईआर और चुनावी डेटा के आईटी सिस्टम से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा कि “जब तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था में दो आयुक्त लगातार महत्वपूर्ण निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कर रहे हों, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन आपत्तियों का निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत हुआ।” उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने इन खबरों के बाद एसआईआर सहित सभी फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिया जाना बताया है। कांग्रेस ने फॉर्म-06 में किए गए बदलाव का भी मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के वैधानिक फॉर्म में बदलाव को लेकर भी आयोग के भीतर आपत्तियां दर्ज हुईं। रिपोर्टों के अनुसार संधू ने अगस्त में इस बदलाव को “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी।
कांग्रेस नेताओं ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ फैसले और इसके बाद बने कानून का उल्लेख करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2023 के कानून में चयन समिति की संरचना में बदलाव किया गया और फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के समय लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने असहमति दर्ज की थी।
एसआईआर के कानूनी आधार पर कांग्रेस ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 तथा संविधान के अनुच्छेद 324 और 327 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के बीच स्पष्ट संतुलन जरूरी है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के मोहिंदर सिंह गिल और ए.सी. जोस मामलों का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया का सीधा संबंध नागरिकों के मताधिकार से है। इसलिए एसआईआर की पूरी प्रक्रिया, उसके मानदंड और आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन कुंवर सिंह निषाद और मीडिया को-आर्डिनेटर पूर्वी जोन पुनीत पाठक भी मौजूद रहे।