नोएडा जेवर एयरपोर्ट के दूसरे चरण विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ याचिकाएं निस्तारित
--कोर्ट ने कहा, अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और सभी नियमों का पालन किया गया है
प्रयागराज, 28 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर के दूसरे चरण (फेज-2 व फेज-3) के विस्तार के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विजयपाल सिंह व 12 अन्य किसानों की याचिकाओं पर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी है और इसमें सभी नियमों का पालन किया गया है। कोर्ट ने पाया कि सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजना के लिए आवश्यक 70 प्रतिशत परिवारों की सहमति का मानक पूरा कर लिया गया है। क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार एक मार्च 2025 तक 73.02 प्रतिशत प्रभावित परिवारों ने अपनी सहमति दे दी थी।
कोर्ट ने किसानों की सबसे बड़ी चिंता अपनी आबादी (रिहायशी जमीन) को लेकर प्रदेश सरकार और यीडा के उस हलफनामे में किए गए वादे पर किया कि विस्थापित परिवारों की आबादी वाली जमीन का कब्जा तब तक नहीं लिया जाएगा, जब तक उन्हें पुनर्वास स्थल पर विकसित प्लॉट नहीं सौंप दिए जाते। याचियों का आरोप था कि धारा 19 के तहत अतिरिक्त जमीन ली जा रही है। कोर्ट ने इसे गलत बताते हुए कहा कि अतिरिक्त जमीन केवल विस्थापितों को बसाने के लिए चिह्नित की गई है, एयरपोर्ट निर्माण के लिए नहीं।
कोर्ट ने कहा कि जिले में कुल बोए गए क्षेत्र के पांच प्रतिशत से कम कृषि भूमि का अधिग्रहण हुआ है, जो कानूनन अनुमत सीमा के भीतर है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई किसान या भूमि मालिक मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं है तो वह कानून की धारा 64 के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकता है।
मामला जेवर तहसील के थोरा, नीमका शाहजहांपुर और ख्वाजपुर सहित 14 गांवों की 1,857 हेक्टेयर से अधिक भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा था। याचिका में याचियों ने मुख्य रूप से अपनी रिहाइशी आबादी को हटाए जाने का विरोध किया था, जिसे कोर्ट ने व्यापक जनहित और राष्ट्रीय महत्व की परियोजना को देखते हुए निस्तारित कर दिया।