वालंटियर नहीं, अब त्रिशूलधारी रणवीर! रामनवमी पर दिखेगा सनातन का नया तेज

- इस बार इतिहास रचेगी रामनवमी शोभायात्रा, गूंजेगी शक्ति की हुंकार

वालंटियर नहीं, अब त्रिशूलधारी रणवीर! रामनवमी पर दिखेगा सनातन का नया तेज

मीरजापुर, 3 अप्रैल (हि.स.)। सदियों से रामनवमी आस्था, शक्ति और मर्यादा का प्रतीक रही है। जैसे-जैसे रामनवमी का दिन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं में शोभायात्रा को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है। इस बार की शोभायात्रा रामभक्ति और शक्ति का संगम बनेगी। ऐसा पहली बार होगा जब रामभक्त त्रिशूल के साथ यात्रा में शामिल होकर वे अपनी श्रद्धा को और प्रगाढ़ करेंगे। यह त्रिशूल न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती देगा, बल्कि रामभक्तों के जोश को भी दोगुना करेगा। हर कोई इस नए बदलाव को लेकर रोमांचित है।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष माता सहाय ने बताया कि रामनवमी के अवसर पर निकाली जाने वाली भव्य शोभायात्रा में इस बार एक नया और अनूठा बदलाव देखने को मिलेगा। हर वर्ष शोभायात्रा की सुरक्षा और व्यवस्थाओं में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों को पहले वालंटियर कार्ड दिए जाते थे, जिससे उनकी पहचान सुनिश्चित होती थी। लेकिन इस बार इन स्वयंसेवकों को वालंटियर कार्ड की बजाय त्रिशूल वितरित किए जाएंगे। रामभक्तों के लिए यह परिवर्तन आस्था, शक्ति और भक्ति का संगम होगा।

बजरंग दल के जिला संयोजक अशोक सिंह ने बताया कि यह त्रिशूल विशेष रूप से कानपुर से मंगाए गए हैं और कुल 151 स्वयंसेवकों को वितरित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य यात्रा में शामिल रामभक्तों को एक नई पहचान देना और उनकी श्रद्धा को और अधिक मजबूत करना है।

आस्था, सुरक्षा और भव्यता का संगम

रामनवमी पर निकलने वाली शोभायात्रा सदियों से श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र रही है। हर वर्ष हजारों रामभक्त इस यात्रा में शामिल होते हैं और भव्य झांकियों के दर्शन कर पुण्य अर्जित करते हैं। यह यात्रा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का एक सशक्त माध्यम मानी जाती है।

त्रिशूल का महत्व

त्रिशूल हिंदू धर्म में शक्ति, भक्ति और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव के प्रमुख अस्त्र के रूप में प्रसिद्ध त्रिशूल, न केवल बुराइयों का नाश करता है, बल्कि सुरक्षा और आत्मरक्षा का भी प्रतीक माना जाता है। शोभायात्रा में शामिल स्वयंसेवकों को त्रिशूल देने का निर्णय इसीलिए लिया गया है ताकि वे न केवल अपने कर्तव्यों को मजबूती से निभा सकें, बल्कि यात्रा में एक अद्वितीय पहचान भी बना सकें।

त्रिशूल का यह विशेष आयोजन क्यों?

शोभायात्रा में एकरूपता : वालंटियर कार्ड की जगह त्रिशूल देने से स्वयंसेवकों की अलग पहचान होगी।

सुरक्षा भी, श्रद्धा भी : त्रिशूल सुरक्षा और आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। इससे स्वयंसेवकों को मानसिक बल मिलेगा।

धार्मिक शक्ति का प्रतीक : श्रीराम जहां अपने हाथ में धनुष धारण करते थे, वहीं उनके भक्त त्रिशूल लेकर शोभायात्रा में सम्मिलित होंगे।

त्रिशूल वितरण की तैयारियां

रामनवमी शोभायात्रा के आयोजकों ने पहले ही कानपुर से 151 त्रिशूल मंगवा लिए हैं। इन्हें विशेष रूप से चुने गए स्वयंसेवकों को वितरित किया जाएगा। इसके एवज में 160 रुपये लिए जाएंगे। इसके लिए बजरंग दल 4 अप्रैल को सुबह 11 बजे विहिप कार्यालय दक्षिण फाटक स्थित इमलहा नाथ महादेव मंदिर पर त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन करेगा।