इलाहाबाद हाईकोर्ट से विजय जिंदल समेत चार को झटका, 14.90 करोड़ के कथित गबन मामले में अग्रिम जमानत खारिज

गाजियाबाद के वेव सिटी थाने में दर्ज मामले में न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने सुनाया आदेश; अभियोजन ने रकम के कथित दुरुपयोग और हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से विजय जिंदल समेत चार को झटका, 14.90 करोड़ के कथित गबन मामले में अग्रिम जमानत खारिज

प्रयागराज, 15 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गाजियाबाद के वेव सिटी थाने में दर्ज करीब 14.90 करोड़ के कथित आर्थिक अपराध के मामले में विजय जिंदल और तीन अन्य की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने यह आदेश दिया। एफआईआर राकेश गर्ग के पर्सनल असिस्टेंट संजय राणा ने 19 नवंबर 2025 को दर्ज कराई।

आरोप है कि फ्रेंड्स लैंड डेवलपर्स फर्म के अलग हो चुके साझेदार राकेश गर्ग और अतुल गर्ग ने ग्रुप हाउसिंग का नक्शा जारी कराने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में 16.80 करोड़ से अधिक बाहरी विकास शुल्क विरोध स्वरूप जमा किया था। 2010 में हाईकोर्ट ने यह शुल्क अवैध ठहराया, लेकिन पैसा लौटाने के बजाय बाद में बचे साझेदारों ने इस रकम को अपने अनधिकृत निर्माण के कंपाउंडिंग शुल्क में समायोजित करा लिया।

आरोप यह भी है कि 7 सितंबर 2025 को शिकायतकर्ता को धमकाया गया और 5 करोड़ की मांग की गई।

कहा गया कि मामला विशुद्ध दीवानी है और 2006 के रिटायरमेंट डीड के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें विवाद का निपटारा मध्यस्थता से होना है। उनका कहना था कि कोई "सौंपी गई संपत्ति" नहीं थी, इसलिए धारा 316(2) नहीं बनती, और संगठित अपराध की धारा 111 के तत्व भी मौजूद नहीं हैं। रकम फर्म ने जमा की थी, जीडीए ने कोई पैसा नहीं लौटाया और आवेदकों को कोई लाभ नहीं हुआ। साथ ही यह भी कहा गया कि 8 जनवरी 2026 के पूरक समझौते के तहत मध्यस्थता कार्यवाही चल रही है।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि रकम गर्ग बंधुओं ने निजी तौर पर जमा की थी और आवेदकों ने उसे अपनी अनियमितताओं के जुर्माने में खपा दिया। उन्होंने बताया कि आवेदकों ने 8 जनवरी 2026 के पूरक समझौते में खुद स्वीकार किया कि 14,90,46,478.72 रूपये रिटायर हुए साझेदारों का है। यह भी कहा गया कि आवेदकों ने शुरू में आपराधिक इतिहास न होने की बात कही, पर बाद में हलफनामे में कई मुकदमे स्वीकार किए। जीडीए अधिकारियों की मिलीभगत और 6.40 करोड़ व 6.50 करोड़ के वापस लिए गए चेकों की बरामदगी के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी बताई गई