किसी फर्म या ठेकेदार को नहीं किया जा सकता अनिश्चितकालीन ब्लैकलिस्ट : हाईकोर्ट
किसी फर्म या ठेकेदार को नहीं किया जा सकता अनिश्चितकालीन ब्लैकलिस्ट : हाईकोर्ट
प्रयागराज, 07 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भदोही स्थित मिश्रा राइस मिल को अनिश्चितकालीन अवधि के लिए काली सूची में डाले जाने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मिल के प्रोपराइटर अनिल मिश्रा की याचिका पर यह आदेश दिया।
मिर्जापुर के क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक (विंध्याचल मंडल) ने 25 अगस्त 2023 को आदेश जारी कर मिश्रा राइस मिल को धान क्रय और उसकी प्रक्रिया से अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। यह कार्रवाई भदोही में दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर की गई थी, जिसमें आरोप था कि संतोष कुमार शुक्ला ने जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर कई किसानों की पहचान फर्जी तरीके से सत्यापित की थी। बाद में इस मामले में याचिकाकर्ता फर्म का नाम भी सामने आया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अनिश्चितकालीन ब्लैकलिस्टिंग पूरी तरह अवैध है, कारण-बताओ नोटिस पहले से ही पूर्वाग्रहग्रस्त मानसिकता से जारी किया गया था, आदेश में कोई ठोस कारण नहीं दिए गए, और पूरा निर्णय केवल आरोप की गंभीरता के आधार पर लिया गया, बिना किसी सामग्री या साक्ष्य के।
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के *कुलजा इंडस्ट्रीज बनाम बीएसएनएल* मामले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी ठेकेदार या व्यापारी को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट करना एक असंगत और अत्यधिक दंड माना जाता है, जब तक कि बेहद गंभीर कदाचार सिद्ध न हो जाए। साथ ही ऑरिक्स फिशरीज बनाम भारत संघ* मामले का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब कारण-बताओ नोटिस में ही प्राधिकारी अपना निष्कर्ष पहले से तय कर लेता है, तो बाद की पूरी प्रक्रिया एक खोखली औपचारिकता बनकर रह जाती है।
न्यायालय ने कांति एसोसिएट्स बनाम मसूद अहमद खान मामले का हवाला देते हुए यह भी दोहराया कि किसी भी अर्द्ध-न्यायिक या प्रशासनिक आदेश में ठोस कारण देना अनिवार्य है, विशेषकर जब वह आदेश किसी पक्ष के लिए प्रतिकूल परिणाम वाला हो।
न्यायालय ने पाया कि आदेश में केवल यह कहा गया था कि "आरोप की गंभीरता" को देखते हुए याचिकाकर्ता का जवाब अस्वीकार्य है, जिसे कोर्ट ने आदेश जारी करने के लिए पर्याप्त कारण मानने से इन्कार कर दिया। परिणामस्वरूप 25 अगस्त 2023 का आदेश रद्द कर दिया गया। हालांकि न्यायालय ने खाद्य विभाग को स्वतंत्रता दी है कि वह चाहे तो कानून के अनुरूप नया कारण-बताओ नोटिस जारी कर सकता है और नया आदेश पारित कर सकता है।