एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, रक्षा गलियारे, एफडीआई समेत कई क्षेत्रों में देश का ग्रोथ इंजन बन रहा उत्तर प्रदेश

एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, रक्षा गलियारे, एफडीआई समेत कई क्षेत्रों में देश का ग्रोथ इंजन बन रहा उत्तर प्रदेश

एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, रक्षा गलियारे, एफडीआई समेत कई क्षेत्रों में देश का ग्रोथ इंजन बन रहा उत्तर प्रदेश

लखनऊ,11 जून । कभी निवेशकों की प्राथमिकता सूची में पीछे रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था में शामिल हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़े स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्र व राज्य सरकार के अभूतपूर्व तालमेल ने विकास की कई अहम पहलों के जरिए यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर किया है।

सपा सरकार में उपेक्षित, योगी सरकार में रिकॉर्ड निवेश

पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। 2017 तक प्रदेश में सीमित एक्सप्रेसवे नेटवर्क था, जिनकी संख्या महज दो थी। वहीं आज उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। फिलहाल यूपी में 9 एक्सप्रेसवे संचालित, 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जिलों में 27 स्थानों पर 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है।

जल-थल-आकाश: हर तरफ खुले रास्ते

वर्ष 2017 से पहले यूपी में केवल दो हवाई अड्डे (लखनऊ, वाराणसी) पूरी तरह और गोरखपुर हवाई अड्डा आंशिक रूप से क्रियाशील था। मोदी सरकार के मार्गदर्शन में योगी सरकार ने 9 वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से विकास किया। नतीजा यह कि प्रदेश में 17 हवाई अड्डे वर्तमान में चालू हैं और 7 अन्य हवाई अड्डों का विकास जारी है। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन के साथ ही यूपी 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला पहला राज्य बन गया।

माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के तहत पूर्वी फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किमी से अधिक हिस्सा यूपी से गुजरता है। पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी का जंक्शन दादरी में स्थित है। भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 यूपी में हैं। भारत का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल और फ्रेट विलेज (100 एकड़ से अधिक) वाराणसी में निर्माणाधीन है।

एफडीआई, फैक्ट्रियों और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि

औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा संकेतक विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों की संख्या और निर्यात होता है। इन तीनों क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जून 2000 से मार्च 2017 तक प्रदेश में मात्र 3,303 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था। जबकि अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया ।



एमएसएमई व ओडीओपी बने गेमचेंजर

वर्तमान में प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। योजना के तहत 20,396 उद्यमियों को 903.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जिससे सवा तीन लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित हुए। कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 8,435 लाभार्थियों को 80.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। इसके साथ ही 24 जिलों में 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

रक्षा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नई पहचान

9 वर्षों में यूपी हाई-टेक उद्योगों का केंद्र बनकर उभरा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के 6 नोड झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और कानपुर विकसित किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अब तक करीब दो सौ एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिनमें लगभग 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 55 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित की जा रही है। एचसीएल और फॉक्सकॉन का यह संयुक्त उपक्रम 3,700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगा। प्रदेश में डेटा सेंटर उद्योग भी तेजी से विकसित हो रहा है। 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता और 2047 तक 40 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

वैश्विक मंच पर बढ़ी यूपी की साख

योगी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए वैश्विक स्तर पर भी सक्रिय प्रयास किए हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान एआई, डेटा सेंटर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में 2.94 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए। सिंगापुर और जापान यात्राओं के दौरान 1.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू प्राप्त हुए और 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनसे लगभग 5 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।