सिव संकल्प कीन्ह मन माहीं, एहि तन सती भेंट अब नाहीं मानस सम्मेलन में बही ज्ञानगंगा
सिव संकल्प कीन्ह मन माहीं, एहि तन सती भेंट अब नाहींमानस सम्मेलन में बही ज्ञानगंगा
फर्रुखाबाद,30 अक्टूबर। डी. पी. बी. पी. कॉलेज मदारबाड़ी में श्री राम कथा के 22 वें मानस सम्मेलन में मानस भूषण अरिमर्दन 'शास्त्री' (हमीरपुर ) ने 'मानस सम्मेलन में अपने विचार व्यक्तकरते हुए कहा कि परमात्मा कण-कण में व्याप्त है,लेकिन हम उसे देख नहीं सकते ।इसके लिये सन्तों के सत्संग से आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है । उन्होंने राजस्थान की कृष्ण भक्त मीराबाई और गुरु रविदास के प्रसंग से ईश्वर की भक्ति के माध्यम से प्रभु के दर्शन पर विचार व्यक्त किये। दिल्ली से पधारी प्रीती रामायणी ने चाहे राम कहो चाहे श्याम कहो." दोनों ही ब्रह्म हैं। श्री राम कथा एवं संताें का सत्संग मानव जीवन जीने का रास्ता दिखाता है ।कृष्ण भक्त मीरा बाई को बचपन से ही कृष्ण की भक्ति राग अनुराग के साथ प्राप्त हुई। उन्होंने राजस्थानी, बन्देलखण्डी, ब्रज के लोक-गीतों में भजन (गीत-संगीत-संवाद) के साथ सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।
आचार्य सर्वेश शुक्ल रामायणी ने श्री राम चरित मानस" के प्रसंगों के माध्यम से कहा कि मानव जीवन ईश्वर की भक्ति के बिना व्यर्थ है। ईश्वर ने हमें इस धरती पर मानवीय कामों के लिये जन्म दिया। बड़े भाग्य मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सद् ग्रंथन गावा। "
कुमारी साधना शर्मा ने श्री राम चरित मानस ्रसंग काे आओ बढ़ाते हुए कहा कि भगवान शंकर ने श्री राम कथा माता सती को सुनाई , लेिकन राम काे सीता विरह में व्याकुल देख वे संदेह में पड़ गईं कि राम भगवान कैसे हाे सकते हैं और राम की परीक्षा लेने गयी। प्रभु राम परीक्षा से नहीं,भक्ति और समर्पण से प्राप्त हाेते हैं। सती ने जिस तरह भगवान राम की परीक्षा ली, उससे से ताे वे शिव से भी त्याज्य हाे गई। भगवान शिव ने पूशाँ देव परीक्षा कैसे लीं। सती ने कहा िक उन्हाेंने परीक्षा नहीं ली। बल्कि आप ही तरह प्रणाम किया। कछु न परीच्छा लीन्ह गुंसाई। कीन्ह प्रनामु आप की नाई भगवान शिव ने ध्यान लगाकर सब देख लिखा। हृदय विचारत संभु सुजाना। सती जाे किया चरित सब जाना। और मन ही मन सती के परित्याग का संकल्प ले लिया। सिव संकल्प कीन्ह मन महां। यह तन सती भेंट अब नाहीं।
वैदिक मंत्रों के साथ पं. अरविन्द चर्तुवेदी एवं पं. सर्वेश शुक्ल ने आयोजन समिति के सदस्य भरत सिंह ब्रजकिशोर सिंह, राहुल कन्नौजिया, संजय गुप्ता, मनीष गुप्ता अमित गुप्ता, राजेश निराला' ने पूजन किया। शारदा भदौरिया, शकुन्तला कन्नौजिया, श्रीमती गीता गुप्ता, निर्मला सिंह, मीरा गुप्ता, रजनी कन्नौजिया प्रिया कनौजिया ने श्री रामदरबार एवं तुलसी मैया की आरती उतारी। प्रसाद शिवराज', मगन सिंह, अभिनव, रामजी, बलराम, युवरान, प्रशान्त, चन्दन सिंह, स्वरूप राजपूत अजय राजपूत ने श्री राम कथा में व्यवस्था में सहयोग दिया। सभी भकों ने श्री राम दरबार एवं मानस की आरती के साथ कथा का विश्राम किया।
श्रीराम कथा का संचालन ब्रजकिशोर सिंह किशोर एवं पं. सर्वेश शुक्ल ने किया। श्री राम कथा के संयोजक भरतसिंह ने श्री राम कथा में आगन्तुक रामभक्तों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया ।