अभियोजन की लापरवाही में नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी बरी
अभियोजन की लापरवाही में नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी बरी
प्रयागराज, 03 जून। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार काे औरैया जिले के एक पॉक्सो मामले में दोषी ठहराए गए अभियुक्त कुंतेश को बरी कर दिया। जिसके लिए अभियोजन की लापरवाही को जिम्मेदार माना। कहा पुख्ता सबूत जुटाने में विफल रहे।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। 9 मई 2017 को जिला औरैया के थाना अयाना क्षेत्र में एक 08 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश- विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), औरैया ने 31 जनवरी 2019 को आरोपित कुंतेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट ने कहा पीड़िता के पिता ने प्रारम्भिक रिपोर्ट में केवल मारपीट का उल्लेख किया था, बाद में मामला छेड़छाड़ में तब्दील हुआ। उसके बाद दुष्कर्म का आरोप जोड़ा गया। पिता ने ट्रायल कोर्ट में अपनी गवाही में भी दुष्कर्म का कोई जिक्र नहीं किया। पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में केवल ‘गंदी बात’ की बात कही। जबकि मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में पहली बार दुष्कर्म का आरोप सामने आया। इसे अदालत ने आरोप में सुधार माना।
कोर्ट ने कहा चिकित्सा साक्षी ने स्पष्ट कहा कि बलात्कार हुआ, यह स्पष्ट नहीं, न बाहरी-आंतरिक चोट, न वीर्य के अवशेष मिले। कोर्ट ने कहा कि बच्ची के बयान में चरणबद्ध सुधार होने से वह ‘स्टर्लिंग विटनेस’ की श्रेणी में नहीं आती। संदेह का लाभ अभियुक्त को दिया जाना अनिवार्य है।
कोर्ट ने अपराध सिद्ध न हो पाने के कारण संदेह का लाभ देते हुए आरोपित कुंतेश को बरी कर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।