इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतीक अहमद के बेटों अली और उमर को छोटे भाई अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अली और उमर को कड़ी सुरक्षा के बीच छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी
प्रयागराज, 07 अगस्त । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अतीक अहमद के जेल में बंद बेटों अली और उमर को उनके छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल दे दी, जिनकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
अदालत ने पैरोल पर कड़ी शर्तें लगाई हैं और राज्य सरकार के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि अली और उमर को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच सीधे कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाए। अदालत ने कहा कि अंतिम संस्कार के बाद अली और उमर को वापस जेल लौटना होगा। दोनों भाइयाें को उनके छोटे भाई अहजाम और उनकी बुआ परवीन कुरैशी से एक घंटे के लिए मिलने की अनुमति दी गई।
पुलिस अधिकारियों को बैठक के स्थान का निर्धारण करने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले, परवीन ने अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अली और उमर को पैरोल पर रिहा करने की याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद सफदर अली काज़मी ने न्यायालय के समक्ष यह बात रखी। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति डीसी सामंत की पीठ ने याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाया। सफदर अली अकादमी ने बताया कि याचिकाकर्ता अली और उमर की सगी बुआ हैं और सर्वोच्च न्यायालय ने पहले अपने आदेश में उन्हें अजम और अबान का अभिभावक नियुक्त किया था।
इसके बाद अदालत ने झांसी और लखनऊ की जेलों में बंद उमर और अली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया। लगभग आधे घंटे बाद, दोनो भाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। जब अदालत ने याचिकाकर्ता के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि वह उनकी बुआ हैं और याचिका दायर करने के लिए अधिकृत हैं। अली और उमर ने अदालत से अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि वे अदालत द्वारा लगाई गई किसी भी शर्त का पालन करने को तैयार हैं। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सरकारी वकील पतंजलि मिश्रा ने अदालत से अनुरोध किया कि दोनों को किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होने से रोकने का निर्देश दिया जाए जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
अदालत ने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और यह उसका कर्तव्य है कि कैदियों को जेलों से स्थानांतरित करने से लेकर उनकी वापसी तक के दौरान किसी भी प्रकार की अशांति न हो।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में एक वचन पत्र प्रस्तुत किया जिसमें कहा गया कि वे अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान मीडिया से बात नहीं करेंगे या किसी भी सोशल मीडिया गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। न ही वे किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे या किसी अन्य कार्यक्रम में भाग लेंगे।
अदालत ने अतीक के दोनों बेटों को पैरोल दे दी और उन्हें इन शर्तों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। काज़मी ने अदालत को सूचित किया कि अंतिम संस्कार आठ अगस्त को रात आठ बजे कसारी-मसारी कब्रिस्तान में होगा। इसके बाद, अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों को सीधे जेल से कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाए और अंतिम संस्कार के बाद वापस जेल लाया जाए।
यह शर्त रखी गई कि अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान, दोनों धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा किसी अन्य गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और न ही किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क करेंगे।
पुलिस के मुताबिक, अबान अपने दोस्तों के साथ अपने भाई अली से मिलने जा रहा था, जो झांसी जेल में बंद है, तभी यह हादसा हुआ। यह दुर्घटना झांसी जिले के खिल्ली गांव के पास हुई।
अबान की कब्र अतीक अहमद की कब्र के पास कसारी-मसारी कब्रिस्तान में तैयार की गई है, जहां अतीक के भाई अशरफ और बेटे असद की कब्रें भी स्थित हैं।