श्री काशी विश्वनाथ धाम में महादेव के समक्ष गूंजा सरोद,महाशिवरात्रि महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां
श्री काशी विश्वनाथ धाम में महादेव के समक्ष गूंजा सरोद,महाशिवरात्रि महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां
वाराणसी,11 फरवरी । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाणारसी में महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित चार दिवसीय “महाशिवरात्रि महोत्सव” के दूसरे दिन बुधवार की संध्या भक्ति और कला के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। धाम परिसर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या ‘शिवार्चनम्’ में जाने माने कलाकारों ने काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के समक्ष संगीत और नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रख्यात सरोद वादक अंशुमान महाराज के मनोहारी वादन से हुआ। उनकी साधनापूर्ण और मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को शिवमय कर दिया। सरोद की गंभीर और आध्यात्मिक ध्वनियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में डुबो दिया।
इसके उपरांत पंडित रविशंकर मिश्र ने शास्त्रीय कथक नृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। भाव, लय और ताल के सशक्त समन्वय से सजी उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथक के माध्यम से उन्होंने शिव तत्व की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की, जिसे खूब सराहना मिली। सांस्कृतिक संध्या का समापन अंशिका सिंह की भजन संध्या से हुआ। उन्होंने शिव भजनों की मधुर एवं ओजपूर्ण प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भजनों की गूंज से संपूर्ण धाम परिसर भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम का संचालन मीनाक्षी दीक्षित ने किया।
मंदिर न्यास के अनुसार, महाशिवरात्रि महोत्सव की यह सांस्कृतिक संध्या केवल कलात्मक प्रस्तुति तक सीमित नहीं रही, बल्कि काशी की सनातन सांस्कृतिक परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और समृद्ध विरासत को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करने का माध्यम बनी। आयोजन ने यह संदेश दिया कि काशी की भक्ति और संस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत, प्रभावशाली और प्रेरणादायी है।
महोत्सव के आगामी दिनों में भी विविध धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।