स्पिरिचुअल टूरिज्म कॉरिडोर : आस्था से अर्थव्यवस्था तक बनेगा वैश्विक विकास का मॉडल

- आध्यात्मिक पर्यटन पर बड़ा दांव, अयोध्या से नैमिषारण्य तक करोड़ों की सौगात

स्पिरिचुअल टूरिज्म कॉरिडोर : आस्था से अर्थव्यवस्था तक बनेगा वैश्विक विकास का मॉडल

लखनऊ, 11 फरवरी । दुनिया में जहां 'स्पिरिचुअल टूरिज्म' तेजी से उभरती आर्थिक शक्ति बन रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश ने इसे विकास की रणनीतिक धुरी बना दिया है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट में अयोध्या, काशी, मथुरा, मीरजापुर और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने 'हिन्दुस्थान समाचार' से बातचीत में कहा कि प्रदेश सरकार ने अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के लिए 150 करोड़ रुपये, मीरजापुर के त्रिकोणीय क्षेत्र के लिए 200 करोड़ रुपये, विंध्यधाम में अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये, काशी के लिए 100 करोड़ रुपये, नैमिषारण्य के लिए 100 करोड़ रुपये तथा 'मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना' के तहत 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को संगठित आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित कर रही है। पर्यटन के आंकड़े इस रणनीति की ताकत को दर्शाते हैं। जनवरी से जून 2025 के बीच 122 करोड़ पर्यटकों ने उत्तर प्रदेश का दौरा किया, जिनमें 121 करोड़ से अधिक घरेलू और 33 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल रहे। यह संख्या कई देशों की कुल आबादी से अधिक है और यूपी को वैश्विक धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर अग्रणी स्थान देती है।

-स्पिरिचुअल इकोनॉमी का ग्लोबल हब बन रहा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व पर्यटन मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने यूपी बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि बुनियादी ढांचे, एयर कनेक्टिविटी, नदी पर्यटन, विरासत संरक्षण और डिजिटल गाइडेंस सिस्टम को और मजबूत किया गया तो उत्तर प्रदेश एशिया के सबसे बड़े 'स्पिरिचुअल टूरिज्म कॉरिडोर' के रूप में उभर सकता है। इससे होटल उद्योग, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और सेवा क्षेत्र में लाखों रोजगार सृजित होने की सम्भावना है। धार्मिक पर्यटन के माध्यम से राजस्व वृद्धि, विदेशी मुद्रा अर्जन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आस्था और अर्थव्यवस्था का यह संगम अब वैश्विक विकास मॉडल की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।