पुलिस फर्जी मुठभेड़ का मामला : सत्र अदालत व मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द, नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश

-हाईकोर्ट ने कहा, खारिज होने के बाद दुबारा नहीं दाखिल की जा सकती धारा 156(3) की अर्जी

पुलिस फर्जी मुठभेड़ का मामला : सत्र अदालत व मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द, नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश

प्रयागराज, 03 अप्रैल (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक बार धारा 156(3) की अर्जी खारिज होने के बाद दुबारा दाखिल नहीं की जा सकती। ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश मथुरा व सीजेएम मथुरा के आदेशों 19 मार्च 24 व 18 सितम्बर 24 को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है और जिला एवं सत्र न्यायाधीश को नये सिरे से पक्षों को सुनकर नियमानुसार पुनरीक्षण अर्जी तय करने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ब्रह्मपाल सिंह उर्फ ब्रह्म प्रकाश शर्मा व छह अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची का कहना था कि श्रीमती शीला देवी ने याचीगण जो गौतमबुद्धनगर में पुलिस थे, उन पर फर्जी मुठभेड़ में उसके बेटे की हत्या करने का आरोप लगाते हुए सी जे एम मथुरा की अदालत में धारा 156(3) के तहत अर्जी दाखिल की। कहा पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की जाय। मजिस्ट्रेट ने अर्जी खारिज कर दी।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने दुबारा धारा 156 (3) की अर्जी दाखिल की। विस्तृत आदेश देते हुए मजिस्ट्रेट ने फिर अर्जी खारिज कर दी। जिसके खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी सत्र अदालत में दाखिल की गई। सत्र अदालत ने बिना याचीगण को नोटिस दिए एकपक्षीय आदेश से अर्जी स्वीकार करते हुए सीजेएम को धारा 156(3) की अर्जी फिर से तय करने का आदेश दिया। जिस पर मजिस्ट्रेट ने एस एस पी मथुरा को एफआईआर दर्ज कराकर सीओ रैंक के अधिकारी से विवेचना कराने का आदेश दिया। जिसकी वैधता को चुनौती दी गई थी।

याची अधिवक्ता विभु राय का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि धारा 156(3) की अर्जी एक बार खारिज होने के बाद दुबारा दाखिल अर्जी पोषणीय नहीं है। जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने सत्र अदालत व सीजेएम के आदेश रद्द कर दिया है।