आस्था से रोजगार तक! सतीश महाना का बड़ा संदेश, तीर्थस्थलों से मजबूत होगी यूपी की अर्थव्यवस्था

उत्तर प्रदेश दर्शन समिट-2026 में आध्यात्मिक पर्यटन को स्थानीय विकास से जोड़ने पर जोर, संस्कृति के संरक्षण और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की अपील

आस्था से रोजगार तक! सतीश महाना का बड़ा संदेश, तीर्थस्थलों से मजबूत होगी यूपी की अर्थव्यवस्था

प्रयागराज, 29 अक्टूबर । हमारे तीर्थस्थल केवल पूजा के स्थान नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और चेतना के आधार हैं। भारतीय संस्कृति मानवता को दिशा देने वाली संस्कृति है। इसके संरक्षण के साथ तीर्थस्थलों का विकास, युवाओं के लिए रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। यह बातें उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने गुरुवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित उत्तर प्रदेश दर्शन समिट-2026 में कहीं।

डेवलपमेंट लीडर्स अलायंस (डीएलए) की ओर से वीजा इंक के सहयोग और पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सहभागिता में आयोजित सम्मेलन का विषय ‘उत्तर प्रदेश : जहां आस्था का भविष्य से मिलन होता है’ रहा। इसमें आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन, आधुनिक तकनीक तथा स्थानीय विकास से जोड़ने पर चर्चा हुई।


मुख्य अतिथि सतीश महाना ने कहा कि भारत की संस्कृति हर प्राणी के प्रति सद्भाव रखने की सीख देती है। हमारी संस्कृति और परंपराएं संस्कारों से परिपूर्ण हैं तथा दृढ़ इच्छाशक्ति को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति पर आघात करने वालों से अधिक खतरा उन लोगों से है, जो गलत होते देखकर भी चुप रहते हैं। ऋषि-मुनियों, संतों और महापुरुषों की इस धरती के लोगों का लक्ष्य राष्ट्र का वैभव बढ़ाना होना चाहिए।

प्रमुख वक्ता आचार्य श्रीकांत मिश्रा ने कहा कि तीर्थस्थलों का विकास करते समय उनकी धार्मिक परंपराओं, मौलिक पहचान और मर्यादाओं का संरक्षण जरूरी है। श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने के साथ प्राचीन परंपराओं को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए।


जिला पंचायत अध्यक्ष वीके सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए तीर्थस्थलों से जुड़े गांवों में संपर्क मार्ग, आधारभूत सुविधाएं और स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं, वीजा के प्रतिनिधि राहुल कपाड़िया ने डिजिटल भुगतान और तकनीकी सुविधाओं को पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय व्यापारियों और छोटे उद्यमियों को भी लाभ मिल सकता है।

सच्चा बाबा आश्रम के डॉ. चंद्रदेव मिश्र ने आध्यात्मिक पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देने की बात कही।

स्थानीय लोगों तक पहुंचे पर्यटन का लाभ

डेवलपमेंट लीडर्स अलायंस के संस्थापक एवं कार्यक्रम संयोजक संकल्प शुक्ल ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत भविष्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का मजबूत आधार है। पर्यटन का उद्देश्य केवल तीर्थस्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना भी होना चाहिए। आस्था से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि प्रयागराज, काशी, अयोध्या, मथुरा सहित प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों को बेहतर सुविधाओं, आधुनिक तकनीक, कुशल मानव संसाधन और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से जोड़ने की जरूरत है। दर्शन पहल के जरिए संवाद को नीतिगत सुझावों और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वर्ष 2047 तक भारत वैश्विक पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल कर सके।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. रंजना त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर आचार्य कमलेश, डॉ. मृत्युंजय राव, रश्मि त्रिपाठी, राजेश केसरवानी, दत्तात्रेय पांडेय, पंडित राजेश शर्मा, शशांक शेखर पांडेय और अजय अग्रहरि सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।