गर्भवती के दिल का संकुचित वाल्व बिना बड़ी सर्जरी के खोला, मां और गर्भस्थ शिशु सुरक्षित
एसआरएन अस्पताल के चिकित्सकों ने बैलून तकनीक से किया सफल उपचार, प्रयागराज मंडल में गर्भावस्था के दौरान पहली बार हुई ऐसी प्रक्रिया
प्रयागराज, 06 नवंबर । चिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता से अब जटिल से जटिल बीमारियों का उपचार भी संभव हो रहा है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के चिकित्सकों ने पांच माह की गर्भवती महिला के दिल का गंभीर रूप से संकुचित वाल्व बिना बड़ी सर्जरी के सफलतापूर्वक खोल दिया। बैलून तकनीक से किए गए इस उपचार के बाद महिला की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं। प्रयागराज मंडल में गर्भावस्था के दौरान इस तकनीक से उपचार का यह पहला मामला बताया जा रहा है।
मांडा क्षेत्र की रहने वाली 25 वर्षीय गर्भवती महिला पिछले कुछ समय से सांस फूलने, बार-बार खांसी आने और सीने में जकड़न की समस्या से परेशान थी। उसकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि लेटना और रात में सोना भी मुश्किल हो गया था। परिजन उसे उपचार के लिए एसआरएन अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच में पता चला कि उसके हृदय का माइट्रल वाल्व गंभीर रूप से संकुचित हो गया है। चिकित्सकीय भाषा में इस बीमारी को सीवियर माइट्रल स्टेनोसिस कहते हैं।
चार मिलीमीटर के छोटे छेद से दिल तक पहुंचाया बैलून
गर्भावस्था के दौरान हृदय पर अतिरिक्त दबाव और मां तथा गर्भस्थ शिशु को होने वाले खतरे को देखते हुए चिकित्सकों ने बिना बड़ी सर्जरी के बैलून तकनीक से उपचार करने का निर्णय लिया। इसके तहत करीब चार मिलीमीटर के छोटे छेद से कैथेटर के माध्यम से 24 मिलीमीटर का बैलून हृदय तक पहुंचाया गया। इसकी मदद से संकुचित वाल्व को खोला गया। प्रक्रिया के दौरान गर्भस्थ शिशु को एक्स-रे विकिरण से बचाने के लिए विशेष फीटल शील्ड का इस्तेमाल किया गया। उपचार के बाद हृदय के दबाव में उल्लेखनीय सुधार हुआ और महिला को सांस लेने में राहत मिली।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पीयूष सक्सेना के निर्देशन में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वैभव श्रीवास्तव, डॉ. विमल कुमार निषाद और डॉ. ऋषिका पटेल ने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। कैथ लैब तकनीशियन विवेक, योगेश और रामनिवास ने भी सहयोग किया।
समय पर जांच और आधुनिक तकनीक से बचाई जा सकती है मां-शिशु की जान : डॉ. संतोष सिंह
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सह आचार्य डॉ. संतोष सिंह के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का उपचार चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें मां के साथ गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। माइट्रल वाल्व के संकुचित होने से हृदय पर दबाव बढ़ता है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसे मामलों में समय पर बीमारी की पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उचित उपचार बेहद जरूरी है। बैलून तकनीक से बिना ओपन हार्ट सर्जरी के वाल्व खोलना संभव है। इस प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतकर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. ए.के. वर्मा ने इस सफलता पर कार्डियोलॉजी विभाग की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एसआरएन अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता और आपसी सहयोग से अब जटिल एवं जोखिमपूर्ण बीमारियों का भी सफल उपचार किया जा रहा है। गर्भवती महिला के हृदय वाल्व का बिना बड़ी सर्जरी के सफल उपचार संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है।