प्रयागराज: पंचमी पर मां कल्याणी देवी ने स्कंदमाता स्वरूप में दिए दर्शन, स्वतंत्र देव सिंह ने उतारी आरती
महाशक्तिपीठ में सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर; शतचंडी यज्ञ में भक्तों ने दी आहुति
प्रयागराज, 15 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र की पंचमी पर महाशक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां कल्याणी देवी ने चतुर्भुजी स्कंदमाता स्वरूप में सिंह पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। मां की गोद में भगवान बालरूप में विराजमान थे। माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंजता रहा। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी मां के दरबार में पहुंचकर मत्था टेका, दर्शन-पूजन किया और आरती उतारी।
मंदिर में तड़के से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह 5:15 बजे पंडित श्याम जी पाठक ने मां का पूजन कर मंगला आरती की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर मां के दर्शन किए। दर्शन-पूजन का क्रम दोपहर एक बजे तक चला। इसके बाद मां का पूजन और महाभिषेक किया गया। शाम सात बजे मां की महाआरती हुई, जबकि रात 12:30 बजे पंडित सुशील कुमार पाठक ने शयन आरती उतारी।
शतचंडी यज्ञ में भक्तों ने दी आहुति
नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में शतचंडी यज्ञ का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में भाग लेकर विधि-विधान से पूजन और हवन किया। भक्तों ने मां के चरणों में सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में बच्चों के मुंडन और कर्णभेदन संस्कार भी कराए गए। पूरे दिन मंदिर में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
आज मां कात्यायनी स्वरूप में देंगी दर्शन
मंदिर के मीडिया प्रभारी राजेश केसरवानी ने बताया कि शुक्रवार, 16 अक्टूबर को नवरात्र के षष्ठी दिवस पर मां कल्याणी देवी का श्रृंगार भगवती कात्यायनी स्वरूप में किया जाएगा। मां चतुर्भुजी स्वरूप में सिंह पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगी। इस अवसर पर मां का बहुरंगी पुष्पों और अनेक आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया जाएगा। गर्भगृह को भी आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा।
नवरात्र मेले की व्यवस्था में पंडित संतोषानंद महाराज, अनिल पाठक, राजेश केसरवानी, कृष्ण कुमार पाठक, महेंद्र तिवारी और सुधीर पाठक सहित अन्य लोग जुटे रहे। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और दर्शन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।