झांसी दहेज हत्या केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, जांच अधिकारी को किया तलब
CDR नहीं निकालने और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज न करने पर मांगा स्पष्टीकरण, 14 अक्टूबर को अगली सुनवाई
प्रयागराज, 08 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने झाँसी के सीपरी बाजार थाना क्षेत्र में दर्ज एक दहेज हत्या मामले में जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान विवेचना की खामियों पर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने विवेचना अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया।
आवेदिका के अधिवक्ता ने कहा कि मृतका की मौत पहली मंजिल से दुर्घटना वश गिरने के कारण हुई, जहाँ वह अपने पति के साथ रहती थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने प्रथम सूचनाकर्ता की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) नहीं निकाली, जबकि एफआईआर में दावा है कि मृतका ने शाम 4:36 बजे उन्हें फोन कर उत्पीड़न की जानकारी दी थी। घर में पूजा के कारण कई लोग मौजूद थे, फिर भी पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह का बयान दर्ज नहीं किया।
उच्च न्यायालय ने विवेचना अधिकारी को अगली तारीख पर स्वयं उपस्थित होने का निर्देश दिया। अधिकारी को अपने साथ प्रथम सूचनाकर्ता और गवाहों के बीएनएसएस की धारा 180 के तहत बयान दर्ज करते समय बनाई गई वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रथम सूचनाकर्ता के मोबाइल की सीडीआर क्यों नहीं ली गई, इसका स्पष्टीकरण और स्वतंत्र गवाहों के बयान क्यों दर्ज नहीं किए गए, इसका स्पष्टीकरण लाने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को होगी।