हमीरपुर जिले के बागेश्वर मंदिर में प्रतिष्ठित है कश्मीर का शिवलिंग, महाशिवरात्रि पर्व पर हुयी विशेष पूजा

-कश्मीर के व्यापारियों ने शिवलिंग के न उठने पर बनवाया था मंदिर-बागेश्वर मंदिर से मुकुट चोरी करने वाले का परिवार समेत हुआ था सर्वनाश

हमीरपुर जिले के बागेश्वर मंदिर में प्रतिष्ठित है कश्मीर का शिवलिंग, महाशिवरात्रि पर्व पर हुयी विशेष पूजा

हमीरपुर, 15 फरवरी। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदहा क्षेत्र के सायर गांव में स्थित बागेश्वर मंदिर में कश्मीर का प्रतिष्ठित शिवलिंग बड़ा ही अद्भुत है। इसे कसौधन समाज के लिये एक तीर्थ स्थान है जहां महाशिवरात्रि पर्व की धूम मची हुयी है। आज यहां कसौदन समाज और आसपास के तमाम इलाकों के लोग बड़े ही श्रद्धा के साथ विशेष पूजा अर्चना कर रहे है।

जिला मुख्यालय से करीब 42 किमी दूर सायर गांव में बागेश्वर मंदिर स्थित है। इस मंदिर का इतिहास भी सैकड़ों साल पुराना है। शिवलिंग भी विशेष तरह का है। इसे देखने से ही मन को बड़ी शांति मिलती है। मंदिर का दृश्य भी बड़ा अद्भुत है। जिसे देखकर श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित हो जाते है। समाजसेवी अम्बिका प्रसाद की माने तो बरगद के पेड़ की डाली तथा जड़ों के बीच एक मंदिर का रूप ये स्थान लिये है। इसी स्थान पर भगवान शिव का अद्भुत शिवलिंग स्थापित है। बताया जाता है कि यह एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां समाज के ही लोग मंदिर की देखरेख करते हैं। हमीरपुर, मौदहा, सुमेरपुर, महोबा और बांदा के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आकर महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष प्रकार की पूजा अर्चना करते है। कश्मीर, महाराष्ट्र और राजस्थान के अलावा तमाम महानगरों से भी कसौधन समाज के लोग बागेश्वर मंदिर में माथा टेकते है।

कश्मीरी व्यापारियों के काफिले के साथ आया था शिवलिंगइतिहासकार डा.भवानीदीन ने रविवार को बताया कि सैकड़ों साल पहले कसौधन समाज के लोग कश्मीर से व्यापार के सिलसिले से पलायन किया था। बड़ी संख्या में लोग बैल गाडिय़ों से कश्मीर से निकले थे। समाज के लोग अपने इष्टदेव शिव लिंग भी लेकर आये थे। ये लोग सायर गांव में कई दिनों तक डेरा डाले रहे। जब समाज के लोग आगे जाने के तैयारी की और शिवलिंग को बैलगाड़ी में रखने की कोशिश की तो शिव लिंग उस स्थान से नहीं हटा। इससे समाज के लोग हैरत में पड़ गये। कसौधन समाज के व्यापारियों से फिर कोशिश की मगर शिव लिंग स्थान से नहीं हिल सका। तब उसी स्थान पर शिव लिंग स्थापित करा दी गयी। समाज के लोगों ने यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराने के साथ ही हर साल कश्मीर से आकर महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा अर्चना करते है। मौजूदा में ये मंदिर आसपास के दर्जनों इलाकों के लिए आस्था का प्रतीक बना हुआ है।

मंदिर से मुकुट चोरी करने वाले का हो गया था नाश भारतीय सेना से नायब सूबेदार के पद से रिटायर्ड होकर सायर गांव में रह रहे रामप्रसाद पाल ने बताया कि बागेश्वर मंदिर बड़ा ही अद्भुत है। इसमें साक्षात भोलेनाथ का वास है। बताया कि कई दशक पहले कुछ लोगों ने मंदिर में धावा बोलकर मुकुट चोरी की थी। चोरी के बाद उसका पूरा परिवार ही नाश हो गया था। एक विशेष सम्प्रदाय के लोगों ने मंदिर में आक्रमण किया था जिस पर उसका समूल नाश हो गया था। रिटायर्ड नायब सूबेदार ने बताया कि मंदिर में एक बड़ा ढोल है जो होली के दिन बजाये जाने की परम्परा है। आसपास के तमाम इलाकों के कसौधन समाज के लोग पूरे श्रद्धा के साथ आयोजन में हिस्सा ले रहे है। शाम को शिव बारात निकाली गयी।