प्रयागराज से किन्नर अखाड़े में बड़ा 'विद्रोह': टीना मां ने छोड़ा अखाड़ा, बनाया 'सनातनी किन्नर अखाड़ा

आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी गुट को खुली चुनौती

प्रयागराज से किन्नर अखाड़े में बड़ा 'विद्रोह': टीना मां ने छोड़ा अखाड़ा, बनाया 'सनातनी किन्नर अखाड़ा

प्रयागराज: धार्मिक और सामाजिक जगत में किन्नर समुदाय की सशक्त पहचान के रूप में स्थापित 'किन्नर अखाड़ा' (Kinnar Akhara) एक बड़े आंतरिक विवाद के बाद दो फाड़ हो गया है। अखाड़े की सबसे वरिष्ठ पदाधिकारियों में से एक और उत्तर प्रदेश किन्नर कल्याण बोर्ड की सदस्य, स्वामी कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है और एक नए, पूर्णतः सनातनी विचारधारा वाले अखाड़े के गठन की घोषणा कर दी है।

यह विभाजन सीधे तौर पर वर्तमान आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व वाले धड़े को खुली चुनौती देता है। टीना मां का आरोप है कि मूल किन्नर अखाड़ा अपनी विचारधारा और संकल्प से भटक गया है।


नए अखाड़े का गठन: मंगलवार को पट्टाभिषेक

स्वामी कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां ने घोषणा की है कि वह मंगलवार, (04/11/2025) की सुबह 10 बजे प्रयागराज के नया बैरहना क्षेत्र में एक नए अखाड़े का विधिवत गठन करेंगी। इस नए संगठन का नाम 'सनातनी किन्नर अखाड़ा' रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल सनातन धर्म के सिद्धांतों का पालन और प्रचार करना होगा।

गठन समारोह के दौरान, टीना मां का पट्टाभिषेक (राज्याभिषेक) किया जाएगा और वह नए अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में पदभार संभालेंगी।

उपस्थित प्रमुख संत: इस ऐतिहासिक मौके पर टीना मां को समर्थन देने के लिए उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण शहरों—अयोध्या, कानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, मिर्जापुर और वाराणसी—समेत कई अन्य क्षेत्रों से किन्नर संत और प्रतिनिधि प्रयागराज पहुंचेंगे।


टीना मां ने क्यों छोड़ा किन्नर अखाड़ा?

सोमवार को अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए टीना मां ने मौजूदा किन्नर अखाड़े (जो एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने को लेकर चर्चा में रहा था) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

1. विचारधारा से भटकाव: टीना मां ने आरोप लगाया कि "किन्नर अखाड़ा अपने संकल्प और मूल विचारधारा से रास्ता भटक गया है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़े की वर्तमान गतिविधियां संतों और आम जनमानस की भावनाओं के अनुरूप नहीं चल रही थीं, जिसके कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।

2. सनातन धर्म प्राथमिकता: उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनका नया 'सनातनी किन्नर अखाड़ा' सिर्फ और सिर्फ सनातन धर्म को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, "अगर इसके लिए हमें अपनी जान भी देनी पड़े, तो हम उसके लिए तैयार रहेंगे।" उन्होंने जोर देकर कहा कि जब अखाड़े के प्रमुख सदस्यों की विचारधाराएं विचलित होती हैं, तो इसका असर पूरे समुदाय और उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर पड़ता है।


2025 महाकुंभ विवाद की जड़

सूत्रों के अनुसार, यह अंदरूनी विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसकी जड़ें महाकुंभ 2025 की तैयारियों और उससे पहले हुए कुछ फैसलों में निहित हैं।

यह विवाद तब गहराया जब किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में कुछ विवादास्पद निर्णय लिए गए। सबसे बड़ी फूट तब सामने आई जब अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को अखाड़े की महामंडलेश्वर की पदवी दी गई थी। इस फैसले से अखाड़े के कई पुराने सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी (जिनमें टीना मां भी शामिल थीं) सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि अखाड़े की पवित्रता और धार्मिकता को बनाए रखने के लिए यह पद केवल योग्य और समर्पित संतों को ही मिलना चाहिए। इस मतभेद ने ही अंदरूनी तौर पर लंबे समय से चल रही खींचतान को सतह पर ला दिया।


कौन हैं स्वामी कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां?

स्वामी कौशल्या नंद गिरी उर्फ टीना मां किन्नर समुदाय की एक अत्यंत सम्मानित और प्रभावशाली हस्ती हैं।

  • मूल पृष्ठभूमि: उनका जन्म उत्तराखंड के देहरादून में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता टेकना नारायण भारतीय नौसेना (नेवी) में कार्यरत थे।
  • प्रारंभिक जीवन और दीक्षा: सामाजिक लोक-लज्जा के कारण उन्हें अपने माता-पिता का अपेक्षित प्यार नहीं मिल सका। उनका पालन पोषण उस्ताद सलमा की देखरेख में हुआ।
  • धार्मिक पद: 2019 के महाकुंभ के दौरान टीना मां को किन्नर अखाड़े में पीठाधीश्वर का पद प्राप्त हुआ। इसके बाद, 2021 में उन्हें अखाड़े की महामंडलेश्वर बनाया गया।
  • राजनीतिक सम्मान: योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें किन्नर कल्याण बोर्ड की सदस्य (Member of the Kinnar Kalyan Board) भी नियुक्त किया है।
  • सामाजिक कार्य: टीना मां का दावा है कि वह 40 से अधिक किन्नर बच्चों की कानूनी अभिभावक (गार्जियन) हैं। वह गर्व से कहती हैं कि उनके आधार कार्ड पर मेरा नाम बतौर 'मां' और 'पिता' दोनों लिखा हुआ है।

अब, सनातनी किन्नर अखाड़े के गठन के साथ ही किन्नर समुदाय के धार्मिक ढांचे में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसका सीधा असर आगामी बड़े धार्मिक आयोजनों पर भी दिख सकता है।