विवाह या लिव इन रिलेशनशिप के लिए दो वयस्क इंसानों की रजामंदी जरूरी : हाईकोर्ट

विवाह या लिव इन रिलेशनशिप के लिए दो वयस्क इंसानों की रजामंदी जरूरी : हाईकोर्ट

विवाह या लिव इन रिलेशनशिप के लिए दो वयस्क इंसानों की रजामंदी जरूरी : हाईकोर्ट

प्रयागराज, 22 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि विवाह या लिव-इन रिलेशनशिप के लिए दो वयस्क इंसानों की रजामंदी जरूरी है। किसी को भी ऐसे दो वयस्कों की निजी स्वतंत्रता में दखल देने का हक नहीं है। लेकिन, यह स्वतंत्रता पूर्ण या असीमित नहीं है, कुछ प्रतिबंधों के अधीन है।

कोर्ट ने कहा एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं तक है ,जहाँ दूसरे का कानूनी अधिकार शुरू होता है।

एक व्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरे व्यक्ति के कानूनी अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा विवाहित जीवन साथी के जीवित रहते उससे तलाक लिए बगैर किसी को भी तीसरे व्यक्ति के साथ विवाह करने या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की कानूनी अनुमति नहीं दी जा सकती।

यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने शांति देवी व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा याची को अपनी सुरक्षा के लिए समादेश जारी करने की मांग करने का अधिकार नहीं है। क्योंकि शादी शुदा को दूसरे के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की कानूनी अनुमति नहीं है।

कोर्ट ने कहा याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती, जो लिव-इन रिलेशनशिप में होने का दावा करते हैं। ऐसा न तो भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया जा सकता है।

फिर भी कोर्ट ने कहा यदि याचिकाकर्ताओं को कोई परेशान करता है या उनके साथ किसी प्रकार की हिंसा की जाती है, तो वे एक अभ्यावेदन प्रस्तुत करके संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकते हैं। यह अपेक्षा की जाती है कि ऐसे अभ्यावेदन की प्राप्ति पर, संबंधित प्राधिकारी उसकी विषय-वस्तु का सत्यापन करेगा और याचिकाकर्ताओं के जीवन तथा शरीर की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विधि के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगा।

याचिका में याचियों ने अपने शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी के हस्तक्षेप करने पर रोक लगाने तथा पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी।