बीबीएयू शोधकर्ताओं ने विकसित किया स्मार्ट ब्रीथ सेंसर
बीबीएयू शोधकर्ताओं ने विकसित किया स्मार्ट ब्रीथ सेंसर
लखनऊ, 14 दिसंबर । लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के भौतिक विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने गैर-इनवेसिव डायबिटीज मॉनिटरिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। विभाग की डॉ. मोनू गुप्ता ने प्रो. बी. सी. यादव के मार्गदर्शन में एक नया पेपर-आधारित स्मार्ट ब्रीथ सेंसर विकसित किया है, जो सांस में मौजूद एसीटोन की पहचान करने में सक्षम है।
शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह सेंसर एक नवीन नैनोकॉम्पोज़िट तकनीक पर आधारित है, जो एक्सहेल्ड ब्रीथ में पाए जाने वाले एसीटोन का पता लगाता है। एसीटोन को डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक विकारों का एक मान्यता प्राप्त बायोमार्कर माना जाता है। यह तकनीक रक्त जांच के बिना, पूरी तरह गैर-इनवेसिव तरीके से रोग की निगरानी का एक आशाजनक विकल्प प्रस्तुत करती है।
यह सेंसर मोलिब्डेनम ट्राइऑक्साइड (MoO₃) और Nb₂CTx MXene के विशिष्ट संयोजन पर आधारित है, जो कम सांद्रता पर भी एसीटोन के प्रति उच्च संवेदनशीलता और चयनात्मकता प्रदर्शित करता है। शोध के अनुसार, यह उपकरण पर्यावरणीय नमूनों के साथ-साथ मानव श्वास में मौजूद एसीटोन की पहचान करने में सक्षम हो सकता है।
इस शोधकार्य को अमेरिकन केमिकल सोसाइटी द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल एप्लाइड इंजीनियरिंग मैटेरियल्स में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है, जिसे विश्वविद्यालय और शोध समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने इस सफलता पर पूरी शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह शोध कम लागत, पोर्टेबल और गैर-इनवेसिव डायग्नोस्टिक तकनीकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक रोगों की नियमित ब्रीथ-बेस्ड मॉनिटरिंग को संभव बना सकता है। इस अवसर पर भौतिक विज्ञान विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भी शोध टीम को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।