वाराणसी गंगा नाव इफ्तार विवाद : हाईकोर्ट ने आठ आरोपितों को दी जमानत
वाराणसी गंगा नाव इफ्तार विवाद : हाईकोर्ट ने आठ आरोपितों को दी जमानत
प्रयागराज, 15 मई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को गंगा नदी (वाराणसी) में एक नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, मांसाहारी भोजन करने और बचे कचरे को नदी में फेंकने के आरोपित आठ मुस्लिम पुरुषों की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं।
उसी दिन जारी किए गए अलग-अलग आदेशों में, न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने 05 आरोपितों को जमानत दी, जबकि न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 03 आरोपितों को जमानत दी। इसके साथ ही, इस मामले में अब तक 14 आरोपितों में से 8 को जमानत मिल चुकी है।
जमानत पाने वालों में मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ, मोहम्मद अनस, मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान शामिल हैं। वाराणसी की सत्र न्यायालय द्वारा 1 अप्रैल को उन्हें राहत देने से इनकार किए जाने के बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उन्हें 17 मार्च को वाराणसी पुलिस ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर गिरफ्तार किया था।
इसके बाद उन पर जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 196(1)(ख) शत्रुता को बढ़ावा देना, 270 सार्वजनिक उपद्रव, 279 सार्वजनिक झरने या जलाशय के जल को प्रदूषित करना, 298 पूजा स्थल को चोट पहुंचाना या अपवित्र करना, 299 जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना या उसके धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना हो, 308 जबरन वसूली और 223(ख) बीएनएस के साथ-साथ धारा 24 प्रदूषणकारी पदार्थों के निपटान के लिए नदी या कुएं के उपयोग पर प्रतिबंध, के तहत मामला दर्ज किया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपित द्वारा पवित्र नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार के दौरान चिकन बिरयानी खाना और बचे हुए हिस्से को पानी में फेंकना ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय’ कृत्य था। मुखबिर ने दावा किया कि यह कृत्य जानबूझकर ‘जिहादी मानसिकता’ को बढ़ावा देने के लिए किया गया था, जिससे सनातन अनुयायियों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची और व्यापक जन आक्रोश फैल गया।