UPTET 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, दो विवादित प्रश्न मूल्यांकन से बाहर; सभी अभ्यर्थियों के अंक फिर से जुड़ेंगे
UPTET 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, दो विवादित प्रश्न मूल्यांकन से बाहर; सभी अभ्यर्थियों के अंक फिर से जुड़ेंगे
प्रयागराज, 30 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी )-2026 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन प्रक्रिया से बाहर करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब परीक्षा प्राधिकरण ने खुद यह स्वीकार कर लिया है कि एक ही प्रश्न के दो विकल्प सही हैं, तो ऐसे त्रुटिपूर्ण प्रश्नों को मूल्यांकन का आधार नहीं बनाया जा सकता।
मामले के अनुसार, यूपी टीईटी -2026 की अंतिम उत्तर कुंजी में आयोग ने प्रश्न संख्या 36 और 37 के दो-दो विकल्पों को सही माना था। आयोग ने केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए थे जिन्होंने इन दोनों में से कोई एक सही विकल्प चुना था। इसके चलते याचिकाकर्ता न्यूनतम अहर्ता अंक से पीछे रह गए और असफल घोषित कर दिए गए। याचियों ने दलील दी कि यूपी टीईटी एक अहर्ता परीक्षा है, जिसमें कोई आपसी प्रतिस्पर्धा नहीं होती है। इसलिए त्रुटिपूर्ण प्रश्नों को या तो विलोपित माना जाए या सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से इसका लाभ दिया जाए।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब एक बहुविकल्पीय प्रश्न में एक से अधिक विकल्प सही मान लिए जाते हैं, तो वह प्रश्न अपनी मूल्यांकन क्षमता खो देता है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे संदिग्ध प्रश्नों को मूल्यांकन से हटाना ही उचित मार्ग है। इसके साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दो प्रश्नों के हटने के बाद अब प्रश्नपत्र 148 अंकों का माना जाएगा और इसी के आधार पर परिणामों की नए सिरे से गणना की जाएगी।
अदालत ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया कि वह सभी प्रभावित अभ्यर्थियों के अंकों की नए सिरे से गणना कर संशोधित स्कोरकार्ड जारी करे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस राहत से अभ्यर्थियों को किसी भी आगामी भर्ती प्रक्रिया में स्वतः चयन या नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाएगा, बल्कि यह केवल यूपी टीईटी-2026 के परिणाम सुधार तक सीमित रहेगा।
याची अधिवक्ता की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि UPTET केवल एक अहर्ता परीक्षा है, जिसमें कोई आपसी प्रतिस्पर्धा नहीं होती है। जब परीक्षा संस्था ने खुद यह मान लिया कि एक ही प्रश्न के दो विकल्प सही हैं, तो पूरी मूल्यांकन व्यवस्था दूषित हो जाती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों के तहत इन त्रुटिपूर्ण प्रश्नों को मूल्यांकन से हटाकर सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से इसका लाभ दिया जाना चाहिए।