यूपी बार काउंसिल का सख्त एक्शन, लखनऊ सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष-महामंत्री का लाइसेंस निलंबित
अनुशासनहीनता के मामले में अखिलेश जायसवाल और अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता पंजीकरण अगले आदेश तक निलंबित किया गया है। दोनों के अदालतों में अधिवक्ता के रूप में पेश होने पर भी रोक लगाई गई है।
प्रयागराज, 27 सितंबर । उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने अनुशासनहीनता के एक मामले में सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता पंजीकरण अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। दोनों के किसी भी न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में उपस्थित होने पर भी रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर मामले की दोबारा सुनवाई के बाद की गई है।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की 23 अगस्त 2026 को हुई सामान्य बैठक में सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल को चेयरमैन, एल्डर्स कमेटी बनाए जाने और चुनाव कराने के लिए अधिकृत किए जाने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पांच मनोनीत सदस्यों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से उक्त प्रस्ताव को अध्यक्ष और मंत्री ने अपने सदन में रखकर कथित रूप से अधिवेशित तरीके से खारिज कर दिया। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने 8 सितंबर 2026 को अखिलेश जायसवाल और अवनीश दीक्षित को निलंबित करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। मामले की सुनवाई के लिए इसे अनुशासन समिति को भेजा गया था।
इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 10 सितंबर को आदेश जारी कर दोनों को सुनवाई का समुचित अवसर दिए जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में 11 सितंबर को मामले को फिर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की बैठक में रखा गया और प्रकरण की सुनवाई के लिए अनुशासन समिति को भेजा गया।
आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना
26 सितंबर को अनुशासन समिति के समक्ष अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित उपस्थित हुए। विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष रखा। विपक्षी पक्ष की ओर से शिकायत की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हुए आवेदन भी दिया गया।
अनुशासन समिति ने मामले में लगाए गए आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना। समिति ने आदेश दिया कि अखिलेश जायसवाल और अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता पंजीकरण अगले आदेश तक निलंबित रहेगा और वे किसी भी न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में उपस्थित नहीं होंगे। मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। समिति के अगले आदेश तक दोनों के खिलाफ की गई कार्रवाई प्रभावी रहेगी।