पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने अपनी आत्मकथा के लोकार्पण पर कहा, भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने अपनी आत्मकथा के लोकार्पण पर कहा, भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना
लखनऊ, 14 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि भाजपा में साधारण कार्यकर्ता भी राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री बन सकता है। भाजपा में जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद नहीं राष्ट्र सर्वोपरि की भावना होती है।उन्होंने कहा कि भाजपा में अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले भी अपनी मेधा के दम पर शीर्ष पदों पर पहुंच सकते हैं। यही भारतीय गणतंत्र की सच्ची विजयगाथा है।
पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा में संवैधानिक शक्तियों के इस्तेमाल, कोविड संकट, सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनके योगदान के अलावा केन्द्र राज्य संबंध व अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े प्रसंग शामिल हैं। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की धर्मपत्नी सविता कोविंद, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा समेत कई गण्यमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक अवसर है। इससे पहले अनेक मंचों से लोगों को संबोधित किया लेकिन आज चर्चा का विषय उनका अपना जीवन है। उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि है। यहीं की मिट्टी में पले-बढ़े और शिक्षा प्राप्त की।
रामनाथ कोविन्द ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि कानपुर देहात के छोटे-से गांव में उनका साधारण घर था। गांव से मिले भाईचारे, संवेदना और बड़ों के सम्मान के संस्कार जीवनभर उनके साथ रहे। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने पर वे स्मृतियां फिर ताजा हो गई थीं। तब उन्होंने कहा था कि देश के किसी गांव में आज भी कोई छोटा-सा रामनाथ टपकती छत के नीचे खड़ा होकर बेहतर भविष्य के सपने देख रहा होगा। आज मोदी और योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्के मकान के साथ गरिमा और सुरक्षा का एहसास कराया है।
रामनाथ कोविद ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए लेकिन यहां जन्मे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनने का अवसर पहली बार मिला। इसे वह अपनी उपलब्धि नहीं बल्कि प्रदेश के करोड़ों लोगों के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान मानते हैं। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता की शक्ति दिखाई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को अभावों से संघर्ष करते हुए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरणादायी यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने अभावों को ढाल नहीं बल्कि आगे बढ़ने और संघर्ष करने का मार्ग बनाया। उन्होंने परिश्रम, पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प के बल पर अपने जीवन की दिशा तय की। उनका जीवन देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश उनकी जन्मभूमि भी है और उनकी कर्मसाधना की भूमि भी। यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिस आत्मकथा का पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विमोचन किया गया था, उसका हिंदी रूपांतरण अब उनकी पावन जन्मभूमि वाले प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विमोचित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की यात्रा हमें बताती है कि महानता केवल अनुकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने से नहीं आती बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने के साहस से प्राप्त होती है। घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे। यही दृढ़ संकल्प उनकी यात्रा की शुरुआत बना। जब परिस्थितियां अनुकूल हों तो लोककल्याण और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए लेकिन विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करने का जज्बा होना चाहिए। यही विशेषता रामनाथ कोविन्द को उस मुकाम तक लेकर गई, जहां उन्होंने पांच वर्ष तक 145 करोड़ भारतवासियों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में देश का नेतृत्व किया। -----------