प्रयागराज के शंकरगढ़ में आरओबी निर्माण को मिली गति, 54 मीटर लंबे गर्डर की लॉन्चिंग पूरी

दिसंबर के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य, नारीबारी और शिवराजपुर के बीच आवागमन होगा सुगम

प्रयागराज के शंकरगढ़ में आरओबी निर्माण को मिली गति, 54 मीटर लंबे गर्डर की लॉन्चिंग पूरी

प्रयागराज, 12 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ में रेलवे क्रॉसिंग के स्थान पर बनाए जा रहे रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। नैनी-मानिकपुर रेलखंड पर शंकरगढ़ यार्ड के पास बन रहे इस आरओबी के लिए 54 मीटर लंबे बो स्ट्रिंग गर्डर की असेंबलिंग और लॉन्चिंग का कार्य 11 अक्टूबर को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके निर्माण से नारीबारी और शिवराजपुर क्षेत्र के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा और बाजार क्षेत्र में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।

उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने साेमवार काे बताया कि महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के मार्गदर्शन में रेल यातायात को सुरक्षित, सुगम और निर्बाध बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है। शंकरगढ़ यार्ड के निकट रेलवे क्रॉसिंग संख्या 415ए के स्थान पर बन रहे इस आरओबी का निर्माण पूरा होने से स्थानीय लोगों के आवागमन को सुविधा मिलेगी। साथ ही, सड़क यातायात के कारण रेल परिचालन पर पड़ने वाले असर को कम करने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि यह परियोजना राज्य सरकार के साथ लागत साझा करने के आधार पर बनाई जा रही है। रेलवे के हिस्से का निर्माण उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट्स) के अधीन गति शक्ति प्रयागराज इकाई करा रही है। वहीं, पहुंच मार्ग यानी एप्रोच रोड का निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड कर रहा है।

वर्ष 2022-23 में स्वीकृत इस परियोजना की कुल लागत 62.67 करोड़ रुपये है। इसमें रेलवे की हिस्सेदारी 23.60 करोड़ रुपये निर्धारित है। आरओबी को दिसंबर 2026 के अंत तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

बाजार क्षेत्र में जाम से मिलेगी राहत

वर्तमान में नारीबारी और शिवराजपुर के बीच आवागमन के लिए रेलवे क्रॉसिंग संख्या 415बी का इस्तेमाल किया जाता है। बाजार क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां अक्सर जाम लग जाता है। इससे सड़क यातायात के साथ रेल परिचालन भी प्रभावित होता है और ट्रेनों को विलंब का सामना करना पड़ता है। आरओबी चालू होने के बाद वाहनों को रेलवे क्रॉसिंग पर रुकने की समस्या से राहत मिलेगी। इससे क्षेत्र में सड़क यातायात अधिक सुचारु होने और रेल परिचालन को निर्बाध बनाए रखने में मदद मिलेगी।