महंत नरेंद्र गिरि की पुण्यतिथि पर संगम नगरी में गूंजे वैदिक मंत्र, समाधि स्थल पर विशेष पूजन
श्रीमहंत बलवीर गिरि के नेतृत्व में संतों और श्रद्धालुओं ने समाधि पर पुष्प अर्पित कर महंत नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि दी, भंडारे में महाप्रसाद भी वितरित हुआ।
प्रयागराज, 26 सितंबर । कैलाशवासी पूज्य गुरुदेव भगवान श्रीश्री 1008 महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज की पावन पुण्यतिथि पर शनिवार को उनकी समाधि स्थल पर श्रद्धा और आस्था का भाव देखने को मिला। निरंजनी अखाड़ा परिषद के श्रीमहंत बलवीर गिरि जी महाराज के नेतृत्व में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजन-अर्चन किया गया। संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने समाधि पर पुष्प अर्पित कर अपने पूज्य गुरुदेव का पुण्य स्मरण किया।
समाधि स्थल पर वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान का पूजन किया गया। वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने अपने गुरुदेव को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर संतों और श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त की।
पुण्यतिथि के अवसर पर संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे एवं प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज की पुण्यतिथि पर प्रत्येक वर्ष संत समाज और श्रद्धालु उनका पुण्य स्मरण करते हैं। इससे पहले भी उनकी पुण्यतिथि पर बाघंबरी गद्दी में समाधि पूजन, पुष्पांजलि और महाप्रसाद का आयोजन होता रहा है। इस अवसर पर उपस्थित संत-महात्माओं ने कहा कि पूज्य गुरुदेव का जीवन संत परंपरा, धर्म और समाजसेवा के प्रति समर्पित रहा। उनके विचार और कार्य सदैव श्रद्धालुओं को प्रेरणा देते रहेंगे। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने गुरुचरणों में नमन कर उनकी स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक याद किया।