इलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोनिक्स तकनीक का समन्वय भविष्य के नए रास्ते खोलेगा : डॉ. अनिल सिंह

ट्रिपल आईटी में सेंसर एवं फोटोनिक उपकरणों पर पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन विशेषज्ञों ने शोध और तकनीकी नवाचारों की दी जानकारी

इलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोनिक्स तकनीक का समन्वय भविष्य के नए रास्ते खोलेगा : डॉ. अनिल सिंह

प्रयागराज, 31 अक्टूबर । इलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोनिक्स तकनीक के बीच बेहतर समन्वय से आधुनिक उपकरणों के विकास और नई तकनीकों के उपयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी। इस क्षेत्र में विकसित हो रहे फोटोनिक एकीकृत परिपथ भविष्य की तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह बातें थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. अनिल सिंह ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी), इलाहाबाद में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन कहीं।

उन्होंने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स का फोटोनिक एकीकृत परिपथों के साथ समन्वय’ विषय पर व्याख्यान देते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोनिक्स के संयुक्त उपयोग तथा इस क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों की जानकारी दी।

कार्यशाला का आयोजन संस्थान के ऑप्टिका (OPTICA) स्टूडेंट चैप्टर के तत्वावधान में किया गया। शनिवार को समापन समारोह और प्रमाण-पत्र वितरण के साथ कार्यशाला संपन्न हुई। संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर एवं चैप्टर के सलाहकार डॉ. सनी शर्मा ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाने के साथ शोध एवं तकनीकी विषयों पर सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला में ट्रिपल आईटी इलाहाबाद सहित देश के विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। पांच दिनों तक चले कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, संवाद और ज्ञान-विनिमय सत्र आयोजित किए गए। इनमें प्रतिभागियों को सेंसर, फोटोनिक उपकरणों, प्रकाशीय तकनीक और उनके नए अनुप्रयोगों की जानकारी दी गई।

अंतिम दिन ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के शास्त्र एआई के शोध वैज्ञानिक डॉ. विभु श्रीवास्तव ने ‘नॉनलाइनियर ऑप्टिक्स से सिंगल-फोटॉन क्यूबिट्स तक : स्पॉन्टेनियस फोर-वेव मिक्सिंग’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रकाश के विशेष गुणों और एकल फोटॉन तकनीक की महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाया। साथ ही स्पॉन्टेनियस फोर-वेव मिक्सिंग की प्रक्रिया, नियंत्रण और आधुनिक फोटोनिक प्रणालियों में इसके उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार तथा सेंसर एवं फोटोनिक उपकरणों के क्षेत्र में हो रहे विकास को समझने का अवसर मिला। इस आयोजन ने प्रतिभागियों को शोध के नए अवसरों और भविष्य की तकनीकी संभावनाओं के प्रति प्रोत्साहित किया।