दीपोत्सव के दशक पर पहली बार होगा 151 वर्ष पुरानी रामलीला का मंचन
दीपोत्सव के दशक पर पहली बार होगा 151 वर्ष पुरानी रामलीला का मंचन
अयोध्या, 06 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अयोध्या दीपोत्सव में पहली बार 151 वर्ष पुरानी रामलीला का मंचन होगा। दसवें दीपोत्सव में विदेशी रामलीलाओं के साथ स्थानीय रामलीला का गौरव भी दिखेगा। इसके कलाकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के समक्ष प्रस्तुति देकर रामनगरी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेंगे।
पिछले दिनों अयोध्या दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव-2026 के आयोजन में विदेशों की रामलीलाओं के साथ स्थानीय रामलीलाओं को भी स्थान देने की अपेक्षा जताई थी। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप स्थानीय स्तर पर विभिन्न रामलीलाओं का मंचन कराकर उनके प्रदर्शन का अवलोकन भी किया गया। इनमें से सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए साहबगंज रामलीला का चयन किया गया है। अब इस रामलीला के कलाकारों को मुख्यमंत्री और उपराष्ट्रपति के समक्ष अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
151 वर्षों से जीवंत है साहबगंज रामलीला की परंपरा
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि अयोध्या में रामलीला की परंपरा का लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। यहां विभिन्न क्षेत्रों में वर्षों से रामलीलाओं का मंचन होता आ रहा है। स्थानीय रामलीलाओं के प्रदर्शन का अवलोकन करने के बाद सर्वश्रेष्ठ का चुनाव किया गया है, जो अयोध्या की सबसे पुरानी साहबगंज रामलीला है। इसे मुख्यमंत्री के समक्ष मंचन का अवसर प्रदान किया जाएगा।
जिले में 200 स्थानों पर होता है रामलीला का मंचन
केंद्रीय रामलीला कमेटी दुर्गा पूजा समिति के जिलाध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया कि साहबगंज रामलीला का यह 151वां वर्ष है। अयोध्या शहर में दशहरे के दौरान लगभग 200 स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जाता है। यह परंपरा केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जनपद में विभिन्न स्थानों पर रामलीलाओं का आयोजन होता है। साहबगंज रामलीला अपनी ऐतिहासिक निरंतरता के कारण विशेष पहचान रखती है।
वैश्विक रामकथा के साथ स्थानीय संस्कृति को मिलेगा मंच
दीपोत्सव में विदेशों की रामलीलाओं के साथ स्थानीय रामलीला को शामिल करने की पहल अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे एक ओर अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के माध्यम से रामकथा की वैश्विक परंपरा प्रदर्शित होगी, वहीं दूसरी ओर पीढ़ियों से रामलीला का मंचन कर रहे स्थानीय कलाकारों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशिष्ट अतिथियों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। रामनगरी का दसवां दीपोत्सव इस बार इसी वैश्विक और स्थानीय सांस्कृतिक संगम का साक्षी बनेगा।