अपीलीय फैसला बरकरार रहने के बावजूद सजा निलंबित करना ‘न्यायिक अनुशासनहीनता’, मजिस्ट्रेट को ट्रेनिंग का आदेश

कुशीनगर की इंचार्ज न्यायिक मजिस्ट्रेट को एक सप्ताह के लिए JTRI लखनऊ से किया जाएगा संबद्ध, हाईकोर्ट ने कानून के बुनियादी प्रावधानों और न्यायिक पदानुक्रम की समझ बेहतर करने को कहा

अपीलीय फैसला बरकरार रहने के बावजूद सजा निलंबित करना ‘न्यायिक अनुशासनहीनता’, मजिस्ट्रेट को ट्रेनिंग का आदेश

"प्रयागराज, 08 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुशीनगर की इंचार्ज न्यायिक मजिस्ट्रेट को एक सप्ताह के प्रशिक्षण के लिए न्यायिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (जेटीआरआई), लखनऊ से संबद्ध करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट का 18 मार्च 2026 का आदेश "न्यायिक अनुशासनहीनता" की श्रेणी में आता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज बजाज की एकल पीठ ने अभियुक्त नागा की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में पारित किया।

अधीनस्थ अदालत ने 25 सितंबर 2025 को नागा को दोषी ठहराया था। इसके खिलाफ सत्र अदालत में आपराधिक अपील दाखिल की गई।अपीलीय अदालत ने 18 मार्च 2026 को यह दोषसिद्धि बरकरार रखी और अपील खारिज कर दी। इसी दिन इंचार्ज न्यायिक मजिस्ट्रेट, कुशीनगर ने दोषी की सजा 16 अप्रैल 2026 तक निलंबित कर दी, ताकि वह आगे अपील दायर कर सके। उस आदेश में खुद अपील खारिज होने का जिक्र था।

जेल में बंद दोषी की ओर से अधिवक्ता कुंजेश कुमार दुबे ने मामला कोर्ट के संज्ञान में लाया। 17 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि मजिस्ट्रेट का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर था, क्योंकि अपील पहले ही खारिज हो चुकी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 430(3) के तहत सजा निलंबित करने का अधिकार तब ट्रायल कोर्ट के पास होता है, जब वह संतुष्ट हो कि दोषी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करना चाहता है। इसके बाद मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा गया।

27 जुलाई 2026 को दाखिल स्पष्टीकरण में न्यायिक अधिकारी ने स्वीकार किया कि सजा निलंबन का आदेश अपीलीय अदालत के फैसले की अवहेलना में पारित हुआ। उन्होंने कहा कि संबंधित लिपिक ने मामले की फाइलें और दस्तावेज उनके सामने नहीं रखे, जिससे सहायता के अभाव में आदेश गलती से पारित हो गया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्टीकरण दरअसल अधिकारी की "कानून की बुनियादी अवधारणा की समझ के अभाव" को उजागर करता है। चूंकि अधिकारी अपने करियर के शुरुआती चरण में हैं, इसलिए फिलहाल उन्हें भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी दी गई। कोर्ट ने कहा कि उनके कौशल को बेहतर बनाना भी जरूरी है।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि न्यायिक अधिकारी को एक सप्ताह के लिए जेटीआरआई, लखनऊ से संबद्ध किया जाए, जहां वे न्यायिक पदानुक्रम, अनुशासन और कानून के प्रयोग के बुनियादी मानदंडों को समझेंगी। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।