महानगर योजना समिति के लिए चुनाव न कराने पर यूपी सरकार और राज्य चुनाव आयोग को फटकार
--चुनाव कराने के लिए जरूरी कार्यवाही पूरी करने का निर्देश
प्रयागराज, 08 अगस्त । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 243-जेड ई में निहित प्रावधान के बावजूद महानगर योजना समिति के लिए चुनाव न कराने पर उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग की खिंचाई की है।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह महानगर नियोजन समिति के चुनाव कराने के लिए आवश्यक सूचना-दस्तावेज की आवश्यकता को निर्दिष्ट करते हुए प्रमुख सचिव, नगर विकास, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को दस दिनों की अवधि के भीतर एक पत्र जारी करें। प्रमुख सचिव, नगर विकास, उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह उक्त पत्र द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को अपेक्षित सूचना उसके बाद दो सप्ताह की अवधि के भीतर उपलब्ध कराएं।
न्यायालय ने यह भी कहा कि उक्त का अनुपालन न करने की स्थिति में, राज्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ प्रमुख सचिव, शहरी विकास, उत्तर प्रदेश सरकार को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर महानगर योजना समिति के चुनाव के लिए सरकार और चुनाव आयोग के बीच समन्वय की कमी के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए। मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी के गठन की मांग को लेकर याचिकाकर्ताओं कमलेश सिंह व दो अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की।
याचिका में कहा गया था कि एक जनहित याचिका में दिए गए न्यायालय के आदेश, जिसमें राज्य चुनाव आयोग को मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी के गठन के लिए राज्य सरकार के पत्र पर विचार करने का निर्देश दिया गया था, उसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि, राज्य चुनाव आयोग के वकील ने राज्य सरकार को जानकारी मांगने वाला एक पत्र दिखाया। लेकिन अदालत ने कहा कि वह अस्पष्ट था और अस्पष्ट पत्र पर कोई जानकारी नहीं दी जा सकती। अदालत ने टिप्पणी की, “दोनों ही चुनाव न कराने का भार एक-दूसरे पर डाल रहे हैं।“ चूंकि वकील ने कहा कि सूचना मांगने के लिए नया पत्र 10 दिनों के भीतर जारी किया जाएगा, इसलिए न्यायालय ने दोनों पक्षों को सूचना का आदान-प्रदान करने तथा चुनाव कराने के लिए समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट इस याचिका पर अब 29 अगस्त को सुनवाई करेगी।