वैज्ञानिकों ने बताए फॉल आर्मीवर्म से मक्के की फसल के बचाव के उपाय
वैज्ञानिकों ने बताए फॉल आर्मीवर्म से मक्के की फसल के बचाव के उपाय
झांसी, 20 अगस्त रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के वैज्ञानिकों ने मक्के की फसल को फॉल आर्मीवर्म कीट से बचाने की सलाह दी है। डॉ.ऊषा और डॉ.प्रियंका कौंडल ने बताया कि वर्तमान में मक्के की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट फॉल आर्मीवर्म है। यह कीट न केवल फसल की उपज को प्रभावित करता है, बल्कि उसकी गुणवत्ता को भी ख़राब कर देता है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि इस कीट की पहली पसंद मक्का है लेकिन यह धान, ज्वार, बाजरा, गन्ना, सब्जियाँ और कपास समेत 80 से अधिक फसलों को क्षति पहुंचाता है। इस कीट की मादा पत्तियों पर 100-200 अंडे देती है अंडों से 2-3 दिनों के बाद इल्लियां निकलती हैं, जो शुरुआती अवस्था में पौधे के केंद्रीय भाग में छिपकर मुलायम पत्तियों की ऊपरी सतह को खुरचकर हरे भाग को खाती हैं, जिससे सफेद धब्बे बन जाते हैं। बाद में ये पत्तियों को खाकर छेद कर देती हैं। गंभीर प्रकोप की स्थिति में पौधों की केंद्रीय पत्तियाँ पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं, प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है। जिससे पौधा कमजोर होकर बौना रह जाता है। यह कीट मक्के के भुट्टे को भी नुकसान करता है, जिससे उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों घटती है। इसकी रोकथाम के लिए इस कीट के अंडों के समूहों और इल्लियों को पहचानकर उन्हें नष्ट कर दें। साथ ही 15 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ की दर से लगाकर इनके नर वयस्कों को इकट्ठा करके नष्ट करें। 5 प्रतिशत निबौली का सत या 5 मिली नीम तेल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जैविक प्रबंधन हेतु बुवेरिआ बैसियाना की 5 ग्राम या मेटरहीजियम अनीसोप्लाइ की 5 ग्राम या नोमुराई रिलेयी की 3 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी के साथ मिलकर छिड़काव करें। इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी की 0.4 ग्राम या स्पिनोसैड 45 प्रतिशत एससी की 0.3 मिली या क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 18.5 प्रतिशत एससी की 0.3 मिली मात्रा को प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर समय से छिड़काव करें।