प्रबोधिनी एकादशी को गूंजा जयघोष, आध्यात्मिक माहौल में संत-महंत ने दिया आशीर्वाद
प्रबोधिनी एकादशी को गूंजा जयघोष, आध्यात्मिक माहौल में संत-महंत ने दिया आशीर्वाद
गोरखपुर, 1 नवंबर । भारत और भारतीयता को लेकर सनातन संस्कृति समेत आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए गुरुकृपा संस्थान कटिबद्ध है। जहां वन्दे भारत मातरम् वहीं वसुधैव कुटुंबकम् की धारणा को बल मिला। विश्व की मंगल कामना के व्यापक दृष्टिकोण ने तीन साल से एक ही मानस की चौपाई विष्व भरन पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।। को बीज मंत्र मानकर गोरखपुर के दाउदपुर में भागीरथ प्रयास जारी है। देवउठनी एकादशी पर सीताराम राधेश्याम का जयघोष गुंजायमान होने के साथ विगत 3 वर्षों से लगातार हरेक महीने शुक्ल पक्ष एकादशी को हो रहे श्रीरामचरित मानस अखंड पाठ का यह 38वां पारायण चल रहा है।
बृजेश राम त्रिपाठी के संयोजकत्व में गुरुकृपा का “सनातन ग्रंथालय” प्रकल्प द्वारा शुक्ल पक्ष प्रबोधिनी एकादशी 04 नवंबर, 2022 को शुरू हुए मानस पाठ पारायण रूपी अनुष्ठान चौथे वर्ष में प्रवेश कर गया।
गुरुकृपा संस्थान के संस्थापक महासचिव बृजेश राम त्रिपाठी ने कहा कि विलुप्त हो रही हमारी प्राचीन परंपराओं, मान्यताओं, सोलह संस्कारों और टूटते पारिवारिक संबंधों में श्रद्धा व आस्था की लौ को पुनः प्रज्वलित करना है।
कार्यक्रम में संतकबीरनगर, कुशीनगर और गोरखपुर शहर के अलावा सुदूर ग्रामीण अंचलों से भी संत-महंतों के आगमन से आयोजन के उद्देश्य को बल मिला। पूज्य महंतों के सान्निध्य में सर्वप्रथम हरि नाम संकीर्तन ‘हरे राम हरे राम, हरे कृष्ण हरे कृष्ण’ हुआ तदोपरांत अखंड मानस पाठ का पारायण। देवउठनी एकादशी पर गंजी, सिंघाड़ा, गन्ना, सुथनी, गुड़ एवं विभिन्न फलों से युक्त फलाहार भंडारे के आयोजन में भारी संख्या में व्रतधारी समेत सनातनियों ने प्रसाद ग्रहण किए।
कार्यक्रम के दूसरे दिन यानी द्वादशी को शालिग्राम-तुलसी विवाह का आयोजन होगा। विवाह बरात निकलने से लेकर सभी वैदिक मांगलिक कार्यक्रम आचार्यगणों द्वारा पूर्ण कराए जाएंगे।
पूज्य संतों ने समेत स्वर में कहा कि “लोककल्याण और सनातन धर्म के पुनर्जीवन” का माध्यम बन चुका यह आयोजन संतानियों धर्मावलंबियों में नव जागरण कर रहा है। लगातार 3 वर्षों चल रहे इस मासिक मानस पाठ ने गोरखपुर को आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना दिया है।
सेवाधारियों को संतों ने दिया आशीर्वाद
दिलीप सिंह, पत्नी सिंह, सुधा त्रिपाठी, सुनीता दीक्षित, वंदना श्रीवास्तव, शंकर शरण दूबे, श्रद्धानंद त्रिपाठी, महेश चंद्र दूबे, अजय मिश्रा, सुनील शुक्ला, रमेश मद्धेशिया, विवेक पासवान, राम नाथ गुप्ता, रमा उपाध्याय, की विशेष भूमिका रहीं जिन्हें संतों द्वारा आशीर्वाद से अभिसिंचित किया गया।
इस अवसर पर महंत रामदास, महंत सीताराम, शिवनाथ, घोड़ाएं बाबा, परशुराम दास, राजेंद्र दास, बालक दास, डा प्रांगेश मिश्रा, सहित भारी संख्या में विद्वान शिक्षक, आचार्य, अर्चक, पुरोहित, संस्कृत छात्र, सनातनियों की भागीदारी रही।