मथुरा के ऐतिहासिक होली गेट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा,

मथुरा के ऐतिहासिक होली गेट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा,

मथुरा के ऐतिहासिक होली गेट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा,

प्रयागराज, 10 जुलाई  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के प्रसिद्ध होली गेट के आसपास व्यापक अतिक्रमण के संबंध में दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने जारी किया, जिसने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख निर्धारित की है। यह घटनाक्रम प्रयागराज से 10 जुलाई को सामने आया है।

यह याचिका मथुरा के प्रतिष्ठित समाजसेवी और चूना कंकड़ गली निवासी श्री प्रकाश चन्द्र अग्रवाल द्वारा दायर की गई है। याची ने अपनी याचिका में बताया है कि मथुरा के होली गेट के चारों ओर बड़े पैमाने पर हुए अवैध अतिक्रमण के कारण क्षेत्र में आए दिन गंभीर यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है। फुटपाथों पर पूरी तरह से अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे पैदल चलने वाले लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके बावजूद, स्थानीय प्रशासन इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई करने में असमर्थ रहा है, जिससे आम जनता को लगातार कठिनाई हो रही है।

इस जनहित याचिका में, प्रकाश चन्द्र अग्रवाल ने कई महत्वपूर्ण अधिकारियों और संस्थाओं को पक्षकार बनाया है। इनमें प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग, लखनऊ; जिलाधिकारी, मथुरा; वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा; महापौर, नगर निगम मथुरा-वृंदावन; और नगर आयुक्त, नगर निगम मथुरा-वृंदावन शामिल हैं। इन सभी से इस गंभीर समस्या के समाधान में उनकी भूमिका पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि सरकार द्वारा जारी शासनादेशों में स्पष्ट निर्देश हैं कि अतिक्रमण हटाने के बाद उसे पुलिस थाने में दर्ज किया जाए, ताकि पुलिस लगातार निगरानी कर सके और यह सुनिश्चित कर सके कि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो। इसके लिए पुलिस को विशेष रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह दर्शाता है कि अतिक्रमण के दोबारा होने पर प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठते हैं और सरकारी निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

यह उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने इस मामले में 28 मार्च को ही राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया था। हालांकि, सरकार की ओर से एक बार फिर जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय की मांग की गई, जिसके बाद न्यायालय ने यह चार सप्ताह का और समय दिया है। यह लगातार दूसरी बार है जब सरकार ने जवाब दाखिल करने में देरी की है।

होली गेट मथुरा का एक महत्वपूर्ण और व्यस्त क्षेत्र है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। यह न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि बाहरी आगंतुकों के लिए भी एक प्रमुख केंद्र है। ऐसे में अतिक्रमण से मुक्ति इस क्षेत्र के सुचारु संचालन, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप से उम्मीद है कि मथुरा के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने और सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।