यूपी में बदला मौसम, तेज हवाओं के साथ बारिश; लखनऊ में बढ़ा गोमती का पानी, निचले इलाकों में चिंता
लखनऊ में शहीद पथ और इकाना के आसपास पहुंचा नदी का पानी, फैजुल्लागंज में 52 नावों से राहत-बचाव जारी; कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर
लखनऊ, 08 अक्टूबर उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई के बीच मौसम ने अचानक करवट ली। बुधवार देर रात लखनऊ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश हुई। पूर्वांचल, मध्य उत्तर प्रदेश और तराई के जिलों में बारिश और हवा के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम में ठंडक बढ़ गई। इस बीच नदियों के बढ़े जलस्तर और निचले इलाकों में जलभराव के कारण प्रशासन की चिंता भी बनी हुई है।
राजधानी लखनऊ में बारिश के बीच गोमती नदी का पानी निचले इलाकों में फैलने से मुश्किलें बढ़ी हैं। शहीद पथ और इकाना स्टेडियम के आसपास नदी का पानी पहुंच गया, जबकि पलासियो मॉल के सामने सड़क पर भी जलभराव की स्थिति रही। सीजी सिटी स्थित ट्रिपल आईटी परिसर में बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित कर छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार रात हनुमान सेतु पर गोमती का जलस्तर 107.25 मीटर दर्ज किया गया। यह 108.50 मीटर के चेतावनी स्तर और 109.50 मीटर के खतरे के निशान से नीचे है। हालांकि फैजुल्लागंज समेत नदी किनारे के कई निचले इलाकों में पानी फैलने से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज करते हुए नावों की व्यवस्था की है।
बीती रात जिलाधिकारी विशाख जी. ने बाढ़ प्रभावित फैजुल्लागंज का निरीक्षण किया। वहां 52 नावों, 04 सहायता कैंप, मेडिकल टीमों और रात में पुलिस पेट्रोलिंग के साथ राहत ऑपरेशन जारी है। जिलाधिकारी के अनुसार गोमती नदी का जलस्तर दिन भर स्थिर बना रहा। उम्मीद है कि अगले 12 से 24 घंटों में पानी का लेवल कम होना शुरू हो जाएगा।
प्रदेश की अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रयागराज में गंगा-यमुना और वाराणसी में गंगा के जलस्तर में हाल की वृद्धि के बाद निचले इलाकों में बाढ़ का दबाव रहा है। केंद्रीय जल आयोग के निगरानी केंद्रों से फाफामऊ, नैनी और वाराणसी में गंगा के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश होने की स्थिति में नदियों के जलस्तर में फिर उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।
पीलीभीत, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, सुलतानपुर और गाजीपुर समेत कई जिलों में बुधवार दिन के साथ ही बीती रात को बारिश दर्ज की गई। कानपुर में तेज हवाओं की गति 76 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची। कई जगहों पर पेड़ टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि गुरुवार को बादल छाए हुए हैं और मौसम में नमी और ठंडक बनी हुई है। उधर, बहराइच और बलरामपुर में भी तेज हवाओं का असर रहा। वाराणसी में बारिश के साथ तेज हवा चलने से कई स्थानों पर पेड़ और डालियां गिरने तथा बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति बनी।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में मौसम में बदलाव सक्रिय मौसम तंत्र के प्रभाव से हुआ है। इसके चलते कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं दर्ज की गईं। उन्होंने कहा कि गुरुवार को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ वज्रपात की भी संभावना है। मौसम तंत्र के कमजोर पड़ने के बाद बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने के आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार अगले एक-दो दिनों में बारिश के कारण अधिकतम तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे सुबह और शाम के समय ठंडक बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने नदियों के जलस्तर और निचले इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।