प्रयागराज में देशभक्ति का महाकुंभ: व्यापारियों ने पूरे जोश से मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस, 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने पर निकली भव्य तिरंगा यात्रा

80वें स्वतंत्रता दिवस पर शहर पश्चिम व्यापारी महासंघ और सुलेम सरांय व्यापार मंडल ने मनाया जश्न

प्रयागराज में देशभक्ति का महाकुंभ: व्यापारियों ने पूरे जोश से मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस, 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने पर निकली भव्य तिरंगा यात्रा

प्रयागराज: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रयागराज की गलियां देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आईं। शहर पश्चिम व्यापारी महासंघ, सुलेम सरांय व्यापार मण्डल और 'नमस्ते भारत परिवार' के संयुक्त तत्वावधान में विगत 27 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को कायम रखते हुए इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया।

ध्वजारोहण और मुख्य अतिथि का संबोधन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुख्य अतिथि के रूप में पधारे शहर पश्चिमी के विधायक एवं पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह द्वारा किया गया ध्वजारोहण रहा। राष्ट्रगीतों और देशभक्ति के नारों से गुंजायमान इस कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध समाजसेवी, क्षेत्रीय पार्षद, सम्मानित अधिवक्ता, चिकित्सक और व्यापारी नेताओं ने सहभागिता की।

अपने संबोधन में विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि, "यह दिन हमारे स्वाभिमान और सम्मान का दिन है। लाखों वीर सपूतों के बलिदान के बाद हमें यह आजादी मिली है।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि आज लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा किया गया 'सप्तधारा' का आह्वान भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नया और सशक्त संकल्प है।

आजादी के बलिदान को याद कर भावुक हुआ जनसमूह इस अवसर पर व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेंद्र खेड़ा ने आजादी के संघर्ष की एक ऐसी मार्मिक घटना साझा की जिसने वहां उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम कर दीं। उन्होंने 14 अगस्त 1947 का वह काला अध्याय याद दिलाया जब लाहौर से अमृतसर पहुंची ट्रेन लाशों से भरी हुई थी। उन्होंने स्टेशन मास्टर छेनी सिंह के उस साहस और मानवीय संवेदना का वर्णन किया, जिनके आह्वान पर ट्रेन में दबे जिंदा लोगों को जीवनदान मिला। नरेंद्र खेड़ा ने कहा, "यह आजादी हमें विरासत में नहीं, बल्कि खून की नदियां पार करके मिली है। नमस्ते भारत परिवार का उद्देश्य ही यही है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और आजादी की कीमत को समझे।"

'वंदे मातरम' के 150 वर्ष: ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में निकाली गई भव्य तिरंगा यात्रा थी। सुलेम सरांय से शुरू हुई यह यात्रा जयंतीपुर और प्रीतमनगर होते हुए मुख्यालय तक पहुंची। यात्रा में डीजे, पाइप बैंड और सजे-धजे घोड़ों ने अद्भुत छटा बिखेरी। 'भारत माता की जय', 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। सैकड़ों की संख्या में व्यापारी और आम नागरिक तिरंगा ध्वज थामे पैदल चल रहे थे, जो एक अखंड भारत और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण पेश कर रहे थे।

कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरे इस सफल आयोजन में मुख्य रूप से नरेंद्र खेड़ा (मान्टू), सह-संयोजक हिमांशु केशरवानी (निक्की), धनंजय सिंह, अतुल केसरवानी, पीयूष जायसवाल, गुलशन अरोरा, अंकुर रस्तोगी, सुनील केसरवानी, वीरेंद्र केसरवानी, मुकेश टोटल, सोनू साहू, राजीव कपूर, मंजीत कुशवाहा, सोनू गुप्ता, नीलू मिश्रा, फय्याज अहमद, सागर ग्रोवर, निरंकार साहू, पीयूष केसरवानी, राकेश केसरवानी और अक्षय सिंह सहित सैकड़ों व्यापारी और क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

पूरे आयोजन ने प्रयागराज में एकता और भाईचारे का संदेश देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि व्यापारी वर्ग न केवल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि देश के गौरव और राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।