प्रयागराज: गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा रद्द, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ गैंग चार्ट में नाम होना अपराध नहीं

देव कुशवाहा समेत अन्य आरोपियों को राहत, हाईकोर्ट ने आरोपपत्र और संज्ञान आदेश भी किया रद्द

प्रयागराज: गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा रद्द, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ गैंग चार्ट में नाम होना अपराध नहीं

प्रयागराज : गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमा रद्द, उच्च न्यायालय ने कहा- गैंग चार्ट में नाम शामिल होना अपने आप में अपराध नहीं

प्रयागराज, 04 नवंबर (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में देव कुशवाहा और अन्य आरोपिताें को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही, आरोपपत्र और संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने दिया। यह मामला ललितपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पुलिस का आरोप था कि आरोपिताें ने मिलकर एक संगठित आपराधिक गिरोह बनाया है और अपने निजी लाभ के लिए आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं। आरोप यह भी था कि इलाके में डर और आतंक का माहौल बनाकर लोगों को शिकायत करने और गवाही देने से रोका जाता था। आरोपिताें की ओर से दलील दी गई कि गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई केवल गैंग चार्ट में नाम शामिल होने और पहले से दर्ज मुकदमों के आधार पर की गई है। आरोपिताें का किसी संगठित गिरोह से जुड़ाव साबित नहीं होता। केवल आपराधिक मुकदमे दर्ज होने से किसी व्यक्ति को गैंगस्टर नहीं माना जा सकता।

राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि पुलिस ने जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्य जुटाए हैं। गैंग चार्ट तैयार करने और उसे मंजूरी देने में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट अपने आप में कोई नया अपराध नहीं बनाता है। किसी व्यक्ति को गैंगस्टर बताने के लिए कानून में अपराध का स्पष्ट आधार होना जरूरी है। केवल गैंग चार्ट में नाम शामिल कर देने से किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई जारी नहीं रखी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपराधी ठहराने के लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। बिना अपराध निर्धारित किए किसी को दंडित नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक स्तर पर तैयार गैंग चार्ट अपने आप में अपराध का आधार नहीं बन सकता।