वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन स्वरोजगार का बेहतर माध्यम : डॉ. मुकेश श्रीवास्तव
वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन स्वरोजगार का बेहतर माध्यम : डॉ. मुकेश श्रीवास्तव
कानपुर, 17 अगस्त । मशरूम उत्पादन कम संसाधनों में स्वरोजगार का बेहतर माध्यम है। इसकी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। यह बातें सोमवार को छह दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश श्रीवास्तव ने कहीं।
चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के पादप रोग विज्ञान विभाग में सोमवार से छह दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। 17 से 22 अगस्त तक चलने वाले प्रशिक्षण में 45 प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मुकेश श्रीवास्तव ने मशरूम उत्पादन की आर्थिक उपयोगिता, पोषण महत्व, रोजगार सृजन की संभावनाओं और वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों पर जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को आधुनिक कृषि में मशरूम उत्पादन की बढ़ती उपयोगिता और आत्मनिर्भरता में इसकी भूमिका के बारे में बताया।
प्रशिक्षण के तहत प्रतिभागियों को प्रयोगशाला का भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान डॉ. शिवानी चौधरी, डॉ. सिद्धार्थ सिंह और टीचिंग एसोसिएट डॉ. सेंथिल कुमार एस ने मशरूम स्पॉन उत्पादन, कम्पोस्ट तैयार करने की विधि, उत्पादन कक्ष की व्यवस्था और प्रयोगशाला में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन से जुड़ी वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है, जिससे वे इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए आवश्यक कौशल विकसित कर सकें। विश्वविद्यालय के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ प्रतिभागियों को रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना है। छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।