वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के खेत तक प्रसार से बढ़ेगा दलहन उत्पादन : डॉ. संजीव गुप्ता
वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के खेत तक प्रसार से बढ़ेगा दलहन उत्पादन : डॉ. संजीव गुप्ता
कानपुर, 30 अगस्त । देश में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और खेत स्तर पर तकनीक के प्रभावी प्रसार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। बैठक में तैयार तकनीकी कार्ययोजना से रबी दलहन फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने में मदद मिलेगी। यह बातें रविवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सी.एसए) के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने कहीं।
सीएसए में अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन अनुसंधान परियोजना की 31वीं वार्षिक समूह बैठक के अंतिम दिन वर्ष 2026-27 के लिए रबी दलहन अनुसंधान की तकनीकी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। दो दिवसीय बैठक में देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों ने रबी दलहन फसलों के अनुसंधान, उत्पादन, फसल सुधार और संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया।
समापन समारोह की अध्यक्षता सीएसए के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने की, जबकि आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. एसके झा ने सह-अध्यक्षता की। कुलपति ने कहा कि अनुसंधान के निष्कर्षों और तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और खेत स्तर पर बेहतर तालमेल जरूरी है।
डॉ. एस के झा ने रबी दलहन अनुसंधान को किसानों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने और वैज्ञानिकों द्वारा तैयार तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित और आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (बीज) डॉ. बीआर चौधरी ने भी अपने विचार रखे।
बैठक के अंतिम सत्र में विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों के लिए तैयार कार्ययोजनाएं और अनुशंसाएं वैज्ञानिकों के सामने रखी गईं। फसल सुधार से संबंधित कार्यक्रम डॉ. ए.के. परिहार ने प्रस्तुत किया। फसल उत्पादन के तहत कृषि विज्ञान और सूक्ष्मजीव विज्ञान से जुड़े कार्यक्रम क्रमशः डॉ. नरेंद्र कुमार और डॉ. के. स्वर्णलक्ष्मी ने प्रस्तुत किए। फसल संरक्षण के अंतर्गत पादप रोग विज्ञान तथा कीट एवं सूत्रकृमि विज्ञान से जुड़े आगामी कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई।
समापन पर अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन अनुसंधान परियोजना के परियोजना समन्वयक डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताया। इसके साथ ही दो दिवसीय 31वीं वार्षिक समूह बैठक का समापन हुआ।