इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी और संस्कृति का रंग, ‘पंच परमेश्वर’ के मंचन से गूंजा न्याय का संदेश
तिलक भवन में लोकगीत और नाट्य मंचन के बीच कुलसचिव प्रो. आशीष खरे ने हिंदी भाषा से जुड़ाव को गर्व का विषय बताया।
प्रयागराज, 28 सितंबर। हिंदी पढ़ना और बोलना गर्व का विषय है। जिस भाषा में हम सोचते हैं, उसी भाषा में अपनी बात कहने में भी सहज हाेते हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हिंदी के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ रहा है। यह बात सोमवार को तिलक भवन में राजभाषा अनुभाग की ओर से आयोजित लोक गायन और नाट्य मंचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आशीष खरे ने कही ।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों में हिंदी पखवाड़े का आयोजन विश्वविद्यालय में इतने व्यापक स्तर पर नहीं हुआ। इस बार शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न राज्यों के साथ दूसरे देशों से भी विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। ऐसे में हिंदी से जुड़ना विश्वविद्यालय की विविधता को भी मजबूती देता है। उन्होंने प्रेमचंद की ‘पंच परमेश्वर’ कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रचना न्याय की महत्ता को प्रभावी ढंग से सामने रखती है। न्याय की कुर्सी पर बैठने के बाद व्यक्ति के लिए मित्र और शत्रु का भेद नहीं रह जाता, बल्कि न्याय ही सर्वोच्च होता है। उन्होंने दर्शकों से नाट्य मंचन देखने की अपील की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. आशीष खरे, अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. अजय जैतली और जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर मौजूद रहीं। कार्यक्रम में लोकगीतों की प्रस्तुतियों के साथ मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘पंच परमेश्वर’ पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा।
अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. अजय जैतली ने राजभाषा अनुभाग और बरगद कला मंच को आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि राजभाषा पखवाड़े के तहत विश्वविद्यालय में विभिन्न कार्यक्रम हो रहे हैं। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के सांस्कृतिक गतिविधियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन से ऐसे आयोजनों को गति मिली है। लंबे समय बाद तिलक भवन विद्यार्थियों से भरा देखकर खुशी हो रही है। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति से जोड़ते हैं।
जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर ने कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के कार्यकाल विस्तार पर विश्वविद्यालय परिवार की ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की प्रगति को आगे भी गति और दिशा मिलती रहेगी। उन्होंने लोक गायन और नाट्य मंचन में शामिल कलाकारों तथा विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और राजभाषा संबंधी गतिविधियों में उनकी भागीदारी को उत्साहवर्धक बताया।
कार्यक्रम का संचालन राजभाषा अनुभाग के संयोजक प्रो. कुमार वीरेंद्र ने किया। उन्होंने सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए कुलपति के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि हिंदी लोगों को आपस में जोड़ने और मिल-जुलकर काम करने की भावना विकसित करती है। उन्होंने बताया कि राजभाषा अनुभाग पहले भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर चुका है। भविष्य में प्रेमचंद के बाद की पीढ़ी के साहित्यकारों की रचनाओं को भी मंच पर प्रस्तुत करने की योजना है। इसी क्रम में राजेंद्र कुमार की ‘वंशीधर की उत्तर कथा’ का मंचन प्रस्तावित है, जो प्रेमचंद की ‘नमक का दरोगा’ कहानी के कथानक को आगे बढ़ाती है।
कार्यक्रम में प्रो. धनंजय चौपड़ा, प्रो. भूरेलाल, प्रो. आदेश कुमार, प्रो. हिमांशु श्रीवास्तव, प्रो. कल्पना वर्मा, रंगकर्मी अनिल रंजन भौमिक, डॉ. लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और शहर के अनेक लोग मौजूद रहे।