पति-पत्नी में समझौते के बाद दहेज उत्पीड़न केस रद्द, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरी कार्यवाही पर लगाई रोक
हाईकोर्ट ने कहा- वैवाहिक विवाद आपसी सहमति से सुलझ चुका, समझौता भी निचली अदालत से सत्यापित; मुकदमा जारी रखने का औचित्य नहीं
प्रयागराज, 07 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पति-पत्नी के बीच हुए समझौते के आधार पर दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले की पूरी केस कार्यवाही रद्द कर दी है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने यह आदेश सुनाया।
सुनील गुप्ता और सोनाली गुप्ता का विवाह 20 नवंबर 2003 को हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच वैवाहिक विवाद शुरू हो गया। पत्नी ने आरोप लगाया कि दहेज की कथित मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित किया गया। इसके बाद उसने कानपुर नगर के थाना जूही क्षेत्र से जुड़ा परिवाद दायर किया।
पांच अप्रैल 2013 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कानपुर नगर ने पति सुनील गुप्ता के साथ उनकी मां विजय लक्ष्मी गुप्ता, बड़े भाई गोपाल गुप्ता, भाभी शालिनी गुप्ता, बहन सावित्री गुप्ता और बहनोई अजीत गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 498-A, 323, 504, 506 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत विचारण के लिए तलब किया था।
सम्मन आदेश और आगे की कार्यवाही को चुनौती देते हुए आवेदकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर किया था। हाईकोर्ट ने पक्षकारों को समझौते के सत्यापन के लिए अधीनस्थ अदालत में पेश होने का निर्देश दिया और निचली अदालत से रिपोर्ट मांगी। अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कानपुर नगर के समक्ष 22 सितंबर 2026 को पति-पत्नी दोनों उपस्थित हुए। उन्होंने बयान दिया कि समझौता स्वेच्छा से किया गया है और वे मामले को आगे नहीं चलाना चाहते। आवेदक सुनील गुप्ता ने इस सत्यापन रिपोर्ट को पूरक शपथपत्र के जरिए हाईकोर्ट में दाखिल किया।
आवेदक के अधिवक्ता ने दलील दी कि पति-पत्नी के बीच समझौता हो चुका है, इसलिए कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पक्षकारों ने आपसी सहमति से वैवाहिक विवाद सुलझा लिया है। समझौता संबंधित न्यायालय द्वारा सत्यापित भी हो चुका है और दोनों ने स्पष्ट रूप से मुकदमा आगे न बढ़ाने की बात कही है। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं रह जाता।
इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने दोनों आवेदन स्वीकार करते हुए परिवाद , पांच अप्रैल 2013 के सम्मन आदेश और उससे जुड़ी सभी परिणामी कार्यवाहियों को
रद्द कर दिया।