मां को अपने बच्चे से मिलने का अधिकार, किंतु अपने घर लाने के लिए पति को बाध्य नहीं कर सकती : हाईकाेर्ट
प्रयागराज, 14 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि बच्चे के पिता को बच्चे को मां के घर लाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, लेकिन मां अपने विजिटेशन राइट का सीधे पिता के घर जाकर उपयोग कर सकती है, उसे थाने जाने की जरूरत नहीं।
चिराग अत्री व अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर न्यायमूर्ति संदीप जैन ने सुनवाई की।
याची का कहना है कि 10.अगस्त .2026 के आदेश से याची मीनू को बेटे चिराग अत्री से मिलने का अधिकार दिया गया था। जिसके तहत वह सत्येन्द्र सिंह पति के घर जाकर बच्चे से मिल सकती है, हर शनिवार-रविवार को अस्थायी कस्टडी ले सकती है और रोज शाम 6 से 9 बजे तक वीडियो कॉल पर बात कर सकती है।
मीनू, सत्येन्द्र सिंह, उनके पिता कांची सिंह और बच्चा चिराग अत्री सभी कोर्ट में हाजिर हुए।
मीनू ने कहा कि उसे विजिटेशन राइट मिल रहा है लेकिन सत्येन्द्र के घर जाने में परेशानी होती है, इसलिए सत्येन्द्र को निर्देश दिया जाए कि वह बच्चे को उसके घर लेकर आए।
कोर्ट ने बच्चे चिराग अत्री से फिर बातचीत की। बच्चे ने दोहराया कि वह अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहता। कोर्ट ने कहा कि विजिटेशन राइट के बावजूद मां और बच्चे के बीच अभी पर्याप्त भावनात्मक जुड़ाव विकसित नहीं हुआ है। बच्चे के हाव-भाव और आचरण से साफ है कि उसका अपने पिता सत्येन्द्र सिंह के साथ गहरा भावनात्मक लगाव है।
कोर्ट को यह भी पता चला कि सत्येन्द्र नौकरी में व्यस्त रहते हैं और बच्चा ज्यादातर अपने दादा कांची सिंह की देखरेख में रहता है, जो कोर्ट में मौजूद थे। सत्येन्द्र और उनके पिता ने बच्चे को मीनू के घर ले जाने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में पिता को बच्चे को मां के घर लाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
लेकिन मीनू को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वह 10.08.2026 के आदेश के तहत सीधे सत्येन्द्र के घर जाकर विजिटेशन और अस्थायी कस्टडी के अधिकार का उपयोग कर सकती है। स्पष्ट किया गया कि उसे इसके लिए थाने जाने की जरूरत नहीं होगी। वह सीधे घर जाकर बच्चे की अस्थायी कस्टडी ले सकती है।
इन्हीं टिप्पणियों के साथ हैबियस कॉर्पस याचिका का निस्तारण कर दिया गया।