आपदा से निपटने के लिए कैसी योजना है

--हाईकोर्ट ने स्वीकार्य योजना तैयार करने को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस विभाग, नोएडा स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग से सुझाव मांगे

आपदा से निपटने के लिए कैसी योजना है

प्रयागराज, 20 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की पानी भरे गड्ढे में मौत के मामले में लम्बित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस विभाग, नोएडा स्थानीय प्रशासन और अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया है कि आपदा प्रबंधन पर प्रस्तावित सुझावों से अवगत कराएं। ताकि आपदा जैसी स्थितियों के लिए एक स्वीकार्य योजना तैयार की जा सके। इसमें विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया (रिस्पॉन्स) भी शामिल है।

कोर्ट ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के वकीलों से यह भी पूछा कि सूचना मिलने के बाद उनकी तैयारी के लिए न्यूनतम आवश्यक समय क्या है। न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए एक अप्रैल की तारीख तय की है।

यह आदेश 27 वर्षीय युवराज मेहता की कार 16 जनवरी को नोएडा के सेक्टर 150 में एक निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गड्ढे में गिरने से डूब गई थी और डूबने के कारण युवराज मेहता की मौत हो गई। आरोप है कि खराब स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट के कारण वहां गहरा गड्ढा बन गया था और विज़टाउन प्लानर्स के नियंत्रण वाला यह स्थल वर्षों से अविकसित पड़ा था।

कोर्ट ने 17 मार्च के आदेश में कहा था कि नोएडा के जवाबी हलफनामे के मुताबिक छह फरवरी को विभिन्न दोषी बिल्डरों को तीन दिनों के भीतर खामियां सुधारने के नोटिस जारी किए गए थे लेकिन हलफनामा इस पर पूरी तरह मौन है कि क्या उपचारात्मक कदम उठाए गए और क्या नोएडा ने वास्तव में उन कदमों का सत्यापन किया।

कोर्ट ने आगे कहा कि हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं है कि नोएडा में आपातकालीन स्थितियों से निपटने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए कोई नोडल अधिकारी नामित है या नहीं। जब घटना का सीधा प्रसारण (लाइव ब्रॉडकास्ट) हो रहा था, तब नोएडा का कौन सा अधिकारी मौके पर पहुंचा, इसका भी उल्लेख नहीं है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि घटना के समय राज्य सरकार के पास सूचना की कोई कमी नहीं थी, क्योंकि मृतक के पिता ने तुरंत डिस्ट्रेस कॉल की थी। पुलिस और पेट्रोलिंग टीम भी पहुंच गई थी। दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ भी वहां पहुंच चुके थे। डूबने से पहले पर्याप्त समय था जिसमें बचाव का प्रयास किया जा सकता था। रिकॉर्ड के अनुसार एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीमें साइट पर मौजूद थीं फिर भी अब तक उनकी ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।