एक ही मामले में बार-बार याचिका, फोरम हंटिग : हाईकोर्ट

एक ही मामले में बार-बार याचिका, फोरम हंटिग : हाईकोर्ट

प्रयागराज, 08 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ही मामले में बार-बार याचिका दायर किए जाने को फोरम हंटिंग का उदाहरण बताते हुए अनुचित निरूपित किया है। तीसरी बार दायर याचिका खारिज करते हुए कहा है कि याची के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने दिया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि एक ही मामले में दूसरी बार सीआरपीसी के 482 क्वैशिंग पिटीशन (रद्दीकरण याचिका) दायर करना संभव नहीं है, अगर पहले से ही सभी तर्क और साक्ष्य उपलब्ध थे। हालांकि यह नियम सभी मामलों में लागू नहीं होता।

यह प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार क्वैशिंग पिटीशन दायर करना चाहता है तो उसे यह साबित करना होगा कि परिस्थितियों में बदलाव आया है। विधिक मंच का दुरुपयोग रोकने के लिए यह आवश्यक है कि अदालतें इस तरह की पिटीशनों को सावधानी से सुनें और निर्णय लें।

मुकदमे से जुड़े संक्षिप्त तथ्य यह है कि याची रामदुलार सिंह ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि वाराणसी के लोहता थाने में दर्ज मामले में आरोप पत्र (चार्जशीट) और एसीजेएम कोर्ट का समन रद किया जाए। मामला धोखाधड़ी तथा धमकाने से संबंधित है। इससे पहले हाईकोर्ट ने 28 मार्च, 2023 को मामले में फैसला सुरक्षित रखा था, लेकिन 14 महीने बाद 27 मई, 2024 तक फैसला नहीं सुनाया गया।

याची ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 14 महीने बाद भी फैसला नहीं सुनाए जाने को अनुचित माना। साथ ही हाईकोर्ट से कहा कि मामले को जल्द से जल्द निपटाएं, यथासंभव तीन महीने के भीतर। शीर्ष अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर विचार नहीं करता, तब तक ट्रायल कोर्ट में सुनवाई प्रक्रिया स्थगित रहेगी। इसके बाद 20 जनवरी, 2025 को हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने इस मामले को कदम पैरवी में खारिज कर दिया क्योंकि कोई भी पक्ष उपस्थित नहीं था। बाद में याची की ओर से आदेश वापसी अर्जी दायर की गई थी।

आठ अप्रैल, 2025 को हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच इस आवेदन को स्वीकार कर लिया। साथ ही निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट निर्णय तक मामले की प्रक्रिया स्थगित रखें। विपक्षी के वकील ने कहा कि यह दूसरा आवेदन है और इसमें भी एक ही प्रार्थना है, जो पूर्व में खारिज की जा चुकी है। याची के वकील ने कहा कि यह आवेदन पहले वाले से अलग है। इसमें चार्जशीट और समन की वैधता को चुनौती है जबकि पहले केवल एनबीडब्ल्यू के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था।