प्रयागराज: नहीं थम रहा जानलेवा चाइनीज मांझे का आतंक, सड़कों पर मंडरा रही मौत का साया
प्रयागराज: नहीं थम रहा जानलेवा चाइनीज मांझे का आतंक, सड़कों पर मंडरा रही मौत का साया
संगम नगरी प्रयागराज की सड़कों पर जानलेवा चाइनीज मांझे का आतंक एक अबूझ पहेली और लगातार बढ़ती विकट चुनौती बन गया है। प्रतिबंधों के बावजूद, यह अदृश्य मगर घातक धागा आए दिन गंभीर दुर्घटनाओं को जन्म दे रहा है, जिससे आम जनजीवन पर मौत का साया मंडरा रहा है। सरकार और प्रशासन द्वारा इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, पतंगबाजी के शौकीन बेखौफ होकर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी वजह से सड़कों पर निकलने वाले हर नागरिक, विशेषकर दुपहिया वाहन चालकों के लिए, यह एक जानलेवा जाल बन चुका है। लोग अपनी जान हथेली पर रखकर आवागमन करने को विवश हैं।
इंजीनियर की गर्दन काटी
इस भयावह खतरे का एक दर्दनाक और ताजा मामला मुठ्ठीगंज थाना क्षेत्र के बलुआ घाट चौराहे पर सामने आया है। अटाला निवासी विद्युत विभाग के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर एहतेशाम अहमद अपनी बाइक से घर वापस लौट रहे थे। वे शायद इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञ थे कि एक अदृश्य मौत का जाल उनका इंतजार कर रहा है। जैसे ही उनकी मोटरसाइकिल बलुआ घाट चौराहे से गुजरी, अचानक एक चाइनीज मांझा उनकी गर्दन से लिपट गया। इससे पहले कि वे संभल पाते या अपनी गाड़ी रोक पाते, मांझे की अत्यंत पैनी धार ने क्षण भर में उनकी गर्दन को बुरी तरह से काट दिया। रक्तस्राव से वे पूरी तरह लहूलुहान हो गए। तभी वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की टीम ने उनकी गर्दन पर गंभीर घाव का इलाज किया, जिसमें 16 टांके लगाने पड़े। फिलहाल इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया है, लेकिन यह घटना मांझे के आतंक की भयावहता को फिर से उजागर करती है।
पहले भी हो चुकी हैं मौतें, सैकड़ों पक्षियों की भी जाती है जान
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। प्रयागराज में पहले भी चाइनीज मांझे के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है, और सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हुए हैं। आम लोगों की सुरक्षा पर यह एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। शहर में ऐसे अनगिनत मामले हैं जो पुलिस रिकॉर्ड या समाचारों तक नहीं पहुंच पाते। लोग चुपचाप अपनी चोटों का इलाज कराते हैं और इस खतरे को नियति मानकर टाल देते हैं। लेकिन भयावह सच्चाई यह है कि यह घातक मांझा न केवल इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, बल्कि हर साल सैकड़ों मासूम पक्षियों की अकाल मौत का कारण भी बनता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
चाइनीज मांझा इतना घातक क्यों है?
चाइनीज मांझा को इतना खतरनाक बनाने वाली इसकी निर्माण प्रक्रिया है। यह साधारण सूती धागे से बिल्कुल अलग होता है। इसे नाइलॉन और प्लास्टिक जैसे सिंथेटिक पदार्थों से बनाया जाता है, और फिर इसकी सतह पर कांच के महीन चूर्ण (बारीक पीसे हुए कांच) और धातु के कणों की परत चढ़ाई जाती है। यह मिश्रण इसे अत्यधिक घर्षण क्षमता और अविश्वसनीय धार प्रदान करता है। परिणामस्वरूप, यह साधारण धागे के मुकाबले कई गुना ज्यादा तीखा और जानलेवा हो जाता है। पलक झपकते ही यह इंसान के गले, चेहरे, हाथों और पैरों को गहराई तक काट सकता है। सड़क पर चलते दुपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए तो यह एक अदृश्य, मगर जानलेवा जाल बनकर मौत की फांस बन जाता है।
प्रशासन से उठ रही सख्त कार्रवाई की मांग
इस गंभीर समस्या के मद्देनजर, स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन से एक स्वर में मांग की है कि इस जानलेवा चाइनीज मांझे के कारोबार पर पूर्णतः और सख्ती से लगाम लगाई जाए। मांगों में शामिल हैं:
- इसकी बिक्री और भंडारण पर तत्काल और प्रभावी प्रतिबंध लगाना।
- इसका उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं और उपयोग करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करना, ताकि एक मिसाल कायम हो सके।
- शहर के बाजारों, पतंग की दुकानों और गली-मोहल्लों में नियमित रूप से औचक छापेमारी अभियान चलाकर ऐसे घातक मांझे को बड़े पैमाने पर जब्त करना।
प्रयागराज को चाइनीज मांझे के आतंक से मुक्त करने और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए अब प्रशासन को और अधिक सक्रिय एवं जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी। यह केवल एक मांझे का नहीं, बल्कि जन सुरक्षा और कानून के राज का सवाल है।