प्रयागराज: उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य शूटर के भाई की नियुक्ति पर विवाद, भाजपा के विरोध के बाद MLC ने लिया पद वापस
प्रयागराज: उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य शूटर के भाई की नियुक्ति पर विवाद, भाजपा के विरोध के बाद MLC ने लिया पद वापस
प्रयागराज में हुए सनसनीखेज उमेश पाल हत्याकांड (फरवरी 2023) के मुख्य शूटर गुलाम हसन के भाई राहिल हसन को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य (MLC) सुरेंद्र चौधरी द्वारा राहिल हसन को अल्पसंख्यक समाज का प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने पर पार्टी के भीतर ही जबरदस्त विरोध शुरू हो गया, जिसके बाद एमएलसी को तत्काल अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
विवाद की जड़: अल्पसंख्यक प्रतिनिधि के रूप में नियुक्ति
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने राहिल हसन को आधिकारिक तौर पर अल्पसंख्यक समाज का प्रतिनिधि (Representative of the Minority Community) नियुक्त किया। चौधरी का यह फैसला तुरंत ही आलोचकों के निशाने पर आ गया क्योंकि राहिल हसन का सीधा संबंध उमेश पाल हत्याकांड के प्रमुख आरोपी गुलाम हसन से है। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह फैसला पार्टी की 'अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस' की नीति का उल्लंघन है।
भाजपा नेताओं ने तर्क दिया कि जिस परिवार का सदस्य उत्तर प्रदेश के सबसे हाई-प्रोफाइल अपराधों में शामिल रहा हो, उस परिवार के किसी सदस्य को सरकारी या पार्टी से जुड़े पद पर नियुक्त करना पीड़ितों और जनता के बीच गलत संदेश देगा। आंतरिक दबाव बढ़ने के कारण, एमएलसी सुरेंद्र चौधरी को कुछ ही समय में राहिल हसन को इस पद से हटाने का निर्णय लेना पड़ा।
पृष्ठभूमि: कौन था गुलाम हसन?
गुलाम हसन, राहिल हसन का बड़ा भाई था और वह प्रयागराज में 24 फरवरी 2023 को हुए उमेश पाल हत्याकांड में शामिल प्रमुख शूटरों में से एक था। उमेश पाल, बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे। इस हत्याकांड में माफिया अतीक अहमद और उसके गिरोह का नाम सामने आया था। वारदात के बाद गुलाम हसन फरार हो गया था और पुलिस ने उस पर इनाम घोषित किया था। बाद में, उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के साथ एक एनकाउंटर में गुलाम हसन को मार गिराया गया था।
राहिल हसन का भावनात्मक बयान
पद से हटाए जाने के बाद राहिल हसन ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उनका बयान बेहद भावनात्मक रहा, जिसमें उन्होंने समाज और व्यवस्था से सवाल किया कि उन्हें अपने भाई के गुनाहों की सजा आखिर कब तक मिलती रहेगी।
राहिल हसन ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मेरे भाई ने जो भी किया, वह उसका निजी कर्म था और उसने उसकी सजा भी भुगती, लेकिन अब मैं एक सामान्य जिंदगी जीना चाहता हूं। मैं पढ़ाई करता हूं और समाज से कटकर नहीं रह सकता। क्या सिर्फ इसलिए कि वह मेरा भाई था, मुझे हर जगह ठुकराया जाता रहेगा? मेरे भाई के गुनाह की सजा मुझे कब तक मिलती रहेगी?"
भाजपा की कार्रवाई और एमएलसी का बचाव
भाजपा के उच्च नेतृत्व ने इस मामले पर संज्ञान लिया और एमएलसी सुरेंद्र चौधरी पर तत्काल कदम उठाने का दबाव बनाया। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी कीमत पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों या उनके रिश्तेदारों को महत्वपूर्ण पदों पर बर्दाश्त नहीं कर सकती।
दबाव के आगे झुकते हुए, एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने राहिल हसन की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी। चौधरी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने नियुक्ति करते समय राहिल हसन के पारिवारिक पृष्ठभूमि की संवेदनशीलता को पूरी तरह से नहीं समझा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला वापस लिया गया है।