प्रयागराज माघ मेला 2026: आस्था और सुरक्षा का संगम, AI और ड्रोन की निगरानी में होगा आयोजन

प्रयागराज माघ मेला 2026: आस्था और सुरक्षा का संगम, AI और ड्रोन की निगरानी में होगा आयोजन

प्रयागराज माघ मेला 2026: आस्था और सुरक्षा का संगम, AI और ड्रोन की निगरानी में होगा आयोजन

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर लगने वाले वार्षिक माघ मेले की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं और प्रशासन इसे अभूतपूर्व रूप से सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। इस वर्ष, 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलने वाले इस विशाल धार्मिक आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है। इसी को ध्यान में रखते हुए, सुरक्षा व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाया गया है, जिसमें पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ अत्याधुनिक तकनीक का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस सुरक्षा कवच

इस बार मेले की सबसे बड़ी खासियत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली है। संगम क्षेत्र और मेले के चप्पे-चप्पे पर लगभग 1,000 हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनमें से कई कैमरे AI तकनीक से लैस हैं। ये स्मार्ट कैमरे केवल वीडियो रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कई विशिष्ट कार्य भी करेंगे:

  • भीड़ प्रबंधन (Crowd Management): ये कैमरे किसी एक स्थान पर क्षमता से अधिक भीड़ जमा होने पर तुरंत नियंत्रण कक्ष को अलर्ट भेजेंगे, जिससे भगदड़ जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति को बनने से पहले ही रोका जा सकेगा।
  • संदिग्ध वस्तु की पहचान: यदि कोई लावारिस बैग, सूटकेस या अन्य संदिग्ध वस्तु काफी देर तक एक ही स्थान पर पड़ी रहती है, तो ये कैमरे उसे पहचानकर सुरक्षाकर्मियों को सूचित करेंगे।
  • असामान्य गतिविधि की निगरानी: किसी भी प्रकार के झगड़े, असामान्य जमावड़े या किसी व्यक्ति के संदिग्ध व्यवहार को यह सिस्टम तुरंत पकड़ लेगा।

चार-स्तरीय सुरक्षा की अभेद्य संरचना

मेले की सुरक्षा को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के नेतृत्व में चार ज़ोन और कई सेक्टरों में विभाजित किया गया है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल ने बताया कि मेला क्षेत्र में 17 अस्थायी पुलिस स्टेशन और दर्जनों पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु अपनी किसी भी समस्या के लिए तुरंत पुलिस तक पहुंच सकें।

उन्होंने आगे बताया, "हमने मुख्यालय से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है, ताकि सुरक्षा का एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया जा सके।"

टेक्नोलॉजी और मानवीय बल का एकीकृत प्रयास

  • इंटीग्रेटेड कमांड, कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन (ICCC) सेंटर: यह सेंटर मेले का 'नर्व सेंटर' होगा। यहीं पर सभी CCTV कैमरों, AI कैमरों और ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड की 24/7 निगरानी की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति में, यहीं से सभी सुरक्षा एजेंसियों को समन्वित तरीके से निर्देश दिए जाएंगे।
  • ड्रोन से हवाई निगरानी: जमीन के साथ-साथ आसमान से भी मेले पर नजर रखी जाएगी। ड्रोन कैमरों का उपयोग घाटों, पार्किंग स्थलों और दूर-दराज के इलाकों की निगरानी के लिए किया जाएगा, जहाँ तक पहुंचना मुश्किल होता है।
  • विभिन्न सुरक्षा बलों की तैनाती: मेले में उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों के अलावा, आतंकवाद-रोधी दस्ते (ATS), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टीमें भी तैनात रहेंगी। इसके अतिरिक्त, नदी में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए जल पुलिस, गोताखोरों और बाढ़ राहत यूनिट की टीमें मोटरबोट के साथ लगातार गश्त करेंगी।

इन सभी तैयारियों का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालु, संत और कल्पवासी बिना किसी भय के पूरी श्रद्धा और शांति के साथ इस आध्यात्मिक मेले में पुण्य की डुबकी लगा सकें और एक सुरक्षित व सहज अनुभव लेकर लौटें।